स्वतंत्र छत्तीसगढ़
भारत को आयुर्वेद का जनक माना जाता है क्योंकि समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश और जड़ी-बूटियों के साथ प्रकट हुए थे। इन्हीं में से एक दिव्य औषधि है मुलेठी, जिसे आयुर्वेद में यष्टिमधु कहा जाता है। यह पौधा स्वाद में मीठा, तासीर में ठंडा और गुणों में अत्यंत समृद्ध है। देश के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। मुलेठी शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं मानी जाती और यह आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा अनेक रोगों में वर्षों से प्रयोग की जाती है।
हिमालयी जड़ी-बूटी और वात-पित्त संतुलन
मुलेठी एक बारहमासी पौधा है, जिसे किसी भी मौसम में उगाया जा सकता है। इसकी खेती मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों में होती है। आयुर्वेद में इसे वात और पित्त दोष को संतुलित करने वाली औषधि माना जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और इम्यूनो-मॉड्यूलेटर गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को रोगों से लड़ने में मदद करते हैं।
मुलेठी का स्वाद मीठा और तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह शारीरिक ऊर्जा को बढ़ाने, तनाव कम करने और आंतरिक शांति प्रदान करने में कारगर है। हालांकि, कफ की प्रवृत्ति वाले लोगों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
गले और श्वसन रोगों का प्राकृतिक उपचार
मुलेठी का सबसे लोकप्रिय उपयोग खांसी, गले की खराश, अस्थमा और सांस लेने में परेशानी जैसी श्वसन समस्याओं में होता है। यह गले के वोकल कॉर्ड को आराम देती है और आवाज को मधुर बनाती है।
उपयोग विधि:
एक चम्मच मुलेठी पाउडर में सितोपलादि चूर्ण और शहद मिलाकर सेवन करें। यह मिश्रण गले की जलन और सूखेपन को कम करता है, साथ ही नियमित आवाज सुधार में भी मददगार है।
आयुर्वेदिक चिकित्सक इसे गायकों, वक्ताओं और उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी मानते हैं, जिनके गले और आवाज से जुड़ी समस्याएँ बार-बार होती हैं।
त्वचा और बालों की देखभाल
मुलेठी त्वचा और बालों के लिए भी वरदान मानी जाती है। यह दाग-धब्बे, खुजली, गंजापन और बाल झड़ने जैसी समस्याओं में लाभ देती है।
उपयोग विधि:
मुलेठी और भृंगराज चूर्ण को दूध में मिलाकर चेहरे और स्कैल्प पर लगाने से त्वचा की चमक बढ़ती है और बालों की जड़ों को मजबूती मिलती है।
आयुर्वेद में इसे त्वचा के निखार और बालों के विकास के लिए वर्षों से प्रयोग किया जाता रहा है। इस प्राकृतिक उपाय से रासायनिक उत्पादों का इस्तेमाल कम किया जा सकता है।
प्रजनन स्वास्थ्य और ऊर्जा में लाभ
मुलेठी पुरुषों में शुक्राणु की संख्या और गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करती है, जबकि महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करती है।
उपयोग विधि:
मुलेठी का काढ़ा बनाकर नियमित सेवन करें। यह हार्मोनल संतुलन बनाए रखने और शारीरिक ऊर्जा बढ़ाने में भी सहायक है।
पाचन स्वास्थ्य और गैस समस्या
मुलेठी पाचन तंत्र के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। यह कब्ज, भूख न लगना, गैस और अपच जैसी समस्याओं में राहत देती है।
उपयोग विधि:
मुलेठी + आंवला चूर्ण + सूखे धनिए का चूर्ण मिलाकर सेवन करें। इसके अलावा, मुलेठी और सौंफ का पाउडर बनाकर भोजन के बाद लिया जा सकता है।
यह उपाय पेट की कार्यक्षमता बढ़ाता है, भूख को संतुलित करता है और गैस से संबंधित परेशानियों को दूर करता है।
आधुनिक जीवन में आयुर्वेदिक महत्व
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग तेजी से प्राकृतिक उपचार की ओर बढ़ रहे हैं। मुलेठी न केवल शारीरिक रोगों में, बल्कि त्वचा, बाल, पाचन, आवाज और प्रजनन स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आयुर्वेद में इसे सदियों से प्राकृतिक औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है।
मुलेठी का नियमित, सही मात्रा में उपयोग शारीरिक ऊर्जा बढ़ाता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है और प्राकृतिक रूप से शरीर को संतुलित रखता है। यह न केवल एक जड़ी-बूटी है, बल्कि आयुर्वेद की अमूल्य देन भी है, जो गले से पेट तक हर स्तर पर लाभकारी साबित होती है।
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