नई दिल्ली :
हाइलाइट :
व्हाइट हाउस ने भारत–अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़ी फैक्टशीट में अहम संशोधन किए।
संशोधित दस्तावेज़ में दालों और कृषि उत्पादों का उल्लेख हटा दिया गया है।
500 अरब डॉलर की खरीद को लेकर ‘प्रतिबद्धता’ शब्द को बदलकर ‘इरादा’ किया गया।
फैक्टशीट में चुपचाप बदले अहम शब्द
भारत और अमेरिका के बीच पिछले सप्ताह घोषित “ऐतिहासिक व्यापार समझौते” के बाद व्हाइट हाउस ने मंगलवार को एक फैक्टशीट जारी की थी, जिसमें समझौते के “आगे के मार्ग” का खाका पेश किया गया था। हालांकि, अब इसी फैक्टशीट के संशोधित संस्करण में कई अहम बदलाव सामने आए हैं। पहले संस्करण में कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं के साथ-साथ सूखे अनाज (डीडीजी), लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट जैसे खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर टैरिफ को समाप्त या कम करेगा। लेकिन अपडेट किए गए दस्तावेज़ में दालों का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया है।
500 अरब डॉलर की खरीद पर बदला रुख
फैक्टशीट में दूसरा बड़ा संशोधन भारत द्वारा अमेरिका से प्रस्तावित वस्तुओं की खरीद को लेकर किया गया है। पहले दस्तावेज़ में कहा गया था कि भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीद करने के लिए “प्रतिबद्ध” है। अब इस शब्दावली को नरम करते हुए इसे “इरादा” कर दिया गया है। पहले के पाठ में यह भी कहा गया था कि भारत ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य उत्पादों की खरीद करेगा, जबकि संशोधित संस्करण में कृषि उत्पादों का उल्लेख भी हटा दिया गया है।
संकेत और कूटनीतिक संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे कूटनीतिक संतुलन और घरेलू हितों की झलक मिलती है। दालों और कृषि उत्पादों को बाहर रखना भारत की खाद्य सुरक्षा और किसान हितों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा माना जा रहा है, वहीं ‘प्रतिबद्धता’ से ‘इरादा’ का बदलाव भविष्य में कानूनी या आर्थिक दबाव से बचने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, संशोधित फैक्टशीट यह संकेत देती है कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत अभी अंतिम रूप से पूरी नहीं हुई है।
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