स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डिजिटल न्यूज़ डेस्क
मुख्य बिंदु
- अर्जुन की छाल को आयुर्वेद में “हृदय बल्य” यानी दिल को मज़बूती देने वाली औषधि कहा गया है।
- यह खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाकर अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में मदद करती है।
- नियमित सेवन से रक्तचाप नियंत्रित रहता है और हृदय रोगों का खतरा कम होता है।
- वैज्ञानिक शोधों में अर्जुन की छाल को हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है।

“अर्जुन की छाल – प्रकृति की वह देन जो दिल को मजबूत, स्वस्थ और संतुलित बनाए रखती है।”
बढ़ता तनाव और गलत खानपान, दिल के लिए सबसे बड़ा खतरा
आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में तनाव, अनियमित दिनचर्या और असंतुलित आहार हमारे दिल पर सीधा असर डालते हैं। जंक फूड, तैलीय भोजन और व्यायाम की कमी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा देती है, जिससे हृदय में रक्त प्रवाह बाधित होता है। यही वजह है कि आजकल कम उम्र में दिल का दौरा (Heart Attack) और स्ट्रोक के मामले बढ़ते जा रहे हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर शरीर संतुलित और पाचन तंत्र मजबूत हो, तो कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में रह सकता है और हृदय स्वस्थ बना रहता है।
अर्जुन की छाल: आयुर्वेदिक चिकित्सा में दिल की ढाल
अर्जुन की छाल (Arjuna Bark) को आयुर्वेद में हृदय की सुरक्षा के लिए रामबाण माना गया है। यह पेड़ भारत के लगभग हर हिस्से में पाया जाता है और इसकी छाल में मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट, टैनिन, फ्लेवोनोइड्स और सैपोनिन हृदय को मजबूत बनाने में सहायक हैं। यह धमनियों में जमा वसा को घोलकर रक्त प्रवाह को सामान्य बनाती है और हृदय की मांसपेशियों को सशक्त करती है। वैज्ञानिक अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि अर्जुन की छाल LDL कोलेस्ट्रॉल को घटाकर HDL कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में सहायक है।
अर्जुन की छाल का सेवन और उपयोग का तरीका
आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को “हृदय बल्य” औषधि कहा गया है, जिसका अर्थ है – हृदय को बल देने वाली दवा। इसे आमतौर पर चूर्ण के रूप में उपयोग किया जाता है। एक चम्मच अर्जुन की छाल का पाउडर दूध या पानी में रातभर भिगोकर सुबह उबालकर पीना सबसे लाभकारी माना जाता है। इसका नियमित सेवन ब्लड प्रेशर संतुलित रखता है, रक्त वाहिकाओं में रुकावट को रोकता है और शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाता है।
विज्ञान भी मानता है अर्जुन की शक्ति
आधुनिक शोधों में पाया गया है कि अर्जुन की छाल में मौजूद सक्रिय तत्व धमनियों में जमी वसा (Arterial Fat) को धीरे-धीरे घोलने में मदद करते हैं। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म (चयापचय) को सुधारता है और लिपिड प्रोफाइल को संतुलित रखता है। इसके अलावा, यह हृदय की दीवारों को मजबूत करता है और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम करता है। मानसिक तनाव को घटाने में भी यह कारगर मानी जाती है, जिससे दिल और दिमाग दोनों शांत रहते हैं।
हृदय को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक दिनचर्या
अर्जुन की छाल के सेवन के साथ-साथ संतुलित आहार, योग, ध्यान और हल्का व्यायाम हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। धूम्रपान, अत्यधिक तैलीय भोजन और तनाव से बचना चाहिए। नियमित रूप से सुबह की सैर, पर्याप्त नींद और हर्बल पेय का सेवन हृदय रोगों से बचाव में मददगार हैं।


