स्वतंत्र छत्तीसगढ़
काठमांडू। नेपाल की राजनीति में शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। देश की जानी-मानी जज और पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की ने नेपाल की नई अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। यह क्षण खास इसलिए है क्योंकि नेपाल के इतिहास में पहली बार कोई महिला प्रधानमंत्री बनी हैं।
73 वर्षीय सुशीला कार्की को यह जिम्मेदारी ऐसे समय में सौंपी गई है जब देश की युवा पीढ़ी पुरानी राजनीति और गठबंधन सरकारों से मोहभंग के दौर से गुजर रही है। सोशल मीडिया बैन से भड़की युवाओं की नाराज़गी बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुकी थी। इसके बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, नेपाली सेना के शीर्ष अधिकारी और युवाओं के प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनी और कार्की के नाम पर मुहर लगी।
कार्की नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रह चुकी हैं और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की उनकी सख्त छवि के कारण ही युवा उन्हें भरोसेमंद नेता मानते हैं। शपथ लेने के बाद उन्होंने कहा कि उनका मकसद अगले छह महीने से एक साल के भीतर निष्पक्ष चुनाव कराना है। उन्होंने साफ किया कि नेपाल को अब ईमानदार राजनीति और नई दिशा की जरूरत है।
प्रधानमंत्री पद के लिए मंथन के दौरान कई नामों पर चर्चा हुई। इनमें काठमांडू के लोकप्रिय मेयर बालेंद्र शाह ‘बालेन’, जो पहले रैपर रह चुके हैं, और नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के पूर्व प्रमुख कुलमान घिसिंग शामिल थे। घिसिंग अपने कार्यकाल में देश से लोडशेडिंग खत्म करने के लिए मशहूर हुए थे। हालांकि, गहन बातचीत के बाद सहमति सुशीला कार्की पर बनी।
नेपाल के राजनीतिक इतिहास में यह घटना एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। युवा पीढ़ी को उम्मीद है कि कार्की के नेतृत्व में देश पारदर्शी राजनीति की ओर कदम बढ़ाएगा।
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