रायपुर/छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स:
करीब एक दशक बाद कनाडा के किसी प्रधानमंत्री का भारत दौरा होने जा रहा है। ऊर्जा, यूरेनियम, जरूरी मिनरल्स, एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों में बड़े समझौतों की उम्मीद है। यह यात्रा भारत-कनाडा संबंधों के लिए एक डिप्लोमैटिक रीसेट मानी जा रही है।
ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी पर फोकस
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले सप्ताह में नई दिल्ली पहुंचेंगे। कनाडा में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश पटनायक के मुताबिक, यह दौरा व्यापार और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने वाला होगा। एजेंडे में यूरेनियम सप्लाई, तेल-गैस, जरूरी खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में समझौते शामिल हैं। खास तौर पर करीब 2.8 बिलियन कनाडाई डॉलर का 10 साल का यूरेनियम सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट भारत के सिविल न्यूक्लियर कार्यक्रम के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। कनाडा के ऊर्जा मंत्री टिम हॉजसन ने कहा कि भारत के बढ़ते न्यूक्लियर प्लान में कनाडा एक भरोसेमंद साझेदार बनना चाहता है।
ट्रेड अनिश्चितता के बीच नई राह की तलाश
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अस्थिरता बढ़ रही है और कनाडा पर चीन से व्यापार को लेकर भारी टैरिफ की चेतावनियां हैं। ऐसे में भारत के साथ साझेदारी ओटावा के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी बन गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, क्रूड ऑयल, एलएनजी और क्लीन-टेक सेक्टर के लिए जरूरी मिनरल्स पर भी बातचीत होगी। इसके साथ ही शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े समझौते लोगों के बीच संपर्क और टैलेंट मूवमेंट को मजबूत करेंगे, जिससे रिश्तों को केवल व्यापार तक सीमित न रखकर व्यापक आधार मिलेगा।
डिप्लोमैटिक रीसेट और CEPA की उम्मीद
पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में निज्जर मामले को लेकर बिगड़े रिश्तों के बाद यह यात्रा एक नए सिरे से भरोसा बहाल करने की कोशिश मानी जा रही है। दिनेश पटनायक ने स्पष्ट किया कि भारत सहयोग के लिए तैयार है, बशर्ते ठोस सबूत सामने आएं। मार्च में कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) पर औपचारिक बातचीत शुरू होने की उम्मीद है, जिसे एक साल के भीतर अंतिम रूप दिया जा सकता है। इस समझौते का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 70 अरब डॉलर तक ले जाना है। साथ ही, आने वाले महीनों में दोनों देशों के वरिष्ठ मंत्रियों और सुरक्षा अधिकारियों के दौरे भारत-कनाडा संबंधों को नई मजबूती देने का संकेत दे रहे हैं।
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