देश/विदेश
हाइलाइट :
• ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन in hu hu R गतिविधियों में तेज़ बढ़ोतरी
• कम ऊंचाई वाले सस्ते ड्रोन से एंटी-ड्रोन सिस्टम की टेस्टिंग
• ‘ईगल प्रहार’ जैसे स्वदेशी काउंटर-ड्रोन सिस्टम तैनात
• जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट, मल्टी-लेयर सुरक्षा पर फोकस
पाकिस्तान की नई रणनीति: कम लागत, अधिक दबाव
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने सीमा पर पारंपरिक संघर्ष के बजाय ड्रोन आधारित ‘लो-कॉस्ट वारफेयर मॉडल’ अपनाया है। इसमें छोटे, सस्ते और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन भेजकर भारतीय सुरक्षा तंत्र की प्रतिक्रिया, रडार कवरेज और एंटी-ड्रोन शील्ड की क्षमता को परखा जा रहा है। इन ड्रोन का उद्देश्य केवल हमला नहीं, बल्कि भारतीय सिस्टम की कमजोर कड़ियों की पहचान भी है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह रणनीति लंबे समय तक दबाव बनाए रखने और खुफिया जानकारी जुटाने पर केंद्रित है।
भारतीय सेना का प्लान: मल्टी-लेयर काउंटर ड्रोन डिफेंस
इस चुनौती से निपटने के लिए भारतीय सेना ने बहुस्तरीय काउंटर-ड्रोन रणनीति अपनाई है। ‘ड्रोन शक्ति’ और ‘ईगल प्रहार’ जैसे स्वदेशी सिस्टम में हार्ड-किल (लेज़र, गन) और सॉफ्ट-किल (जैमिंग, स्पूफिंग) तकनीकों का संयोजन है। इसके साथ AI-आधारित ट्रैकिंग, मोबाइल काउंटर-ड्रोन यूनिट्स और सीमावर्ती इलाकों में 24×7 निगरानी को तेज किया गया है। जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
आगे की दिशा: प्रिवेंटिव डिटरेंस और टेक्नोलॉजी एज
आने वाले समय में भारत का फोकस प्रिवेंटिव डिटरेंस पर रहेगा—यानी ड्रोन को सीमा पार करने से पहले निष्क्रिय करना। साथ ही, घरेलू रक्षा उद्योग के साथ तेज़ी से उन्नत सेंसर, माइक्रो-रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमताएं विकसित की जाएंगी। स्पष्ट है कि यह संघर्ष केवल हथियारों का नहीं, बल्कि तकनीक, गति और बुद्धिमत्ता का है।
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