स्वतंत्र छत्तीसगढ़
28 अगस्त 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। आज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है, जिसके बाद प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा। पूर्णिमा का दिन देवी आराधना, शुभ संकल्प, आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
आज माता लक्ष्मी, मां सरस्वती और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी माना गया है। यह दिन सभी प्रकार की शुभकामनाओं की अभिव्यक्ति, पारिवारिक सुख-समृद्धि, ज्ञान की प्राप्ति और जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए अनुकूल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना करने से मन को शांति और जीवन में शुभ ऊर्जा प्राप्त होती है।
28 अगस्त 2026 का पंचांग
- विक्रम संवत : 2082
- मास : भाद्रपद
- पक्ष : शुक्ल पक्ष
- दिन : शुक्रवार
- तिथि : पूर्णिमा
- योग : अतिगंड
- नक्षत्र : शतभिषा
- करण : बव
- चंद्र राशि : कुंभ
- सूर्य राशि : सिंह
- सूर्योदय : सुबह 05:56 बजे
- सूर्यास्त : शाम 06:48 बजे
- चंद्रोदय : शाम 06:58 बजे
- चंद्रास्त : चंद्रास्त नहीं
- राहुकाल : सुबह 10:45 से दोपहर 12:22 बजे तक
- यमगंड : दोपहर 03:35 से शाम 05:11 बजे तक
आज का नक्षत्र
आज चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेगा और शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। शतभिषा नक्षत्र का विस्तार कुंभ राशि में माना जाता है। इसके देवता वरुण हैं और इसके स्वामी राहु हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से इस नक्षत्र को अत्यधिक शुभ नक्षत्रों में नहीं गिना जाता, लेकिन कुछ विशेष कार्यों के लिए इसका महत्व माना जाता है।
आज का दिन यात्रा की योजना बनाने, आध्यात्मिक उन्नति के प्रयास करने, आत्मचिंतन, ध्यान-साधना तथा मित्रों और शुभचिंतकों से मिलने-जुलने के लिए अच्छा माना जा सकता है। पूर्णिमा और शुक्रवार का संयोग देवी आराधना के महत्व को और बढ़ा देता है।
आज के दिन का वर्जित समय
आज सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक राहुकाल रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में नए और महत्वपूर्ण शुभ कार्यों की शुरुआत करने से परहेज करना चाहिए।
इसके अलावा यमगंड, गुलिक काल, दुमुहूर्त और वर्ज्यम जैसे समयों में भी महत्वपूर्ण शुभ कार्यों को टालना उचित माना जाता है। यदि कोई विशेष पूजा, विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करने या अन्य मांगलिक कार्य करना हो, तो शुभ मुहूर्त का विचार अवश्य करना चाहिए।
आज का संदेश: पूर्णिमा का यह पावन दिन मन की शुद्धि, सकारात्मक संकल्प, देवी आराधना और आत्मिक उन्नति के लिए समर्पित करें। मां लक्ष्मी से समृद्धि, मां सरस्वती से ज्ञान और मां पार्वती से सुख-शांति की प्रार्थना करें।



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