रायपुर / स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डिजिटल न्यूज़ डेस्क
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हर साल कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह का आयोजन होता है। इस दिन मां तुलसी और भगवान विष्णु शालिग्राम जी का विवाह रचाया जाता है। पूजा में तुलसी का पौधा, शालिग्राम, केले के पत्ते, गन्ना, नारियल और सुहाग सामग्री का विशेष महत्व है। सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह Tulsi Vivah 👉 का पावन पर्व मनाया जाता है। यह पर्व देवउठनी एकादशी Dev Uthani Ekadashi के अगले दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु Lord Vishnu और मां तुलसी Maa Tulsi का दिव्य विवाह किया जाता है। तुलसी विवाह का पर्व सौभाग्य, समृद्धि और पारिवारिक सुख का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
तुलसी विवाह में आवश्यक सामग्री
तुलसी विवाह में विशेष रूप से निम्न वस्तुओं की आवश्यकता होती है — तुलसी का पौधा, शालिग्राम जी या भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर, लाल या पीला कोरा कपड़ा, पूजा की चौकी, कलश, सोलह श्रृंगार की सामग्री (बिछुए, चुनरी, सिंदूर, मेहंदी, बिंदी, काजल आदि), मौसमी फल और सब्जियां जैसे आंवला, बेर, मूली, सिंघाड़ा, अमरूद, नारियल, कपूर, धूप, दीप, चंदन, हल्दी की गांठ, केले के पत्ते और गन्ना। इन वस्तुओं के बिना तुलसी विवाह का पूजन अधूरा माना जाता है।
तुलसी विवाह की पूजन विधि
पूजन से पहले स्थल को स्वच्छ करें और रंगोली से सजाएं। केले के पत्तों और गन्ने से मंडप तैयार करें। पूजा स्थल पर तुलसी का पौधा, शालिग्राम जी और भगवान विष्णु की मूर्ति को स्थापित करें। मां तुलसी को सुहाग की सामग्री अर्पित करें और उन्हें दुल्हन की तरह सजाएं। भगवान विष्णु को वर के रूप में पूजें और गन्ना, केला, मूली, सिंघाड़ा आदि का भोग लगाएं। घी के 11 दीपक जलाएं, भजन-कीर्तन करें और आरती के बाद प्रसाद वितरण करें।
तुलसी विवाह के विशेष नियम और महत्व
तुलसी विवाह के दिन भगवान विष्णु के भोग में तुलसी दल Tulsi Leaves अवश्य चढ़ाएं, बिना तुलसी के भोग अधूरा माना जाता है। सूर्यास्त के बाद तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाना शुभ होता है। इस दिन तुलसी की 7 या 11 बार परिक्रमा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता तुलसी की कृपा प्राप्त होती है।
तुलसी विवाह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह पारिवारिक प्रेम, एकता और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन की पूजा से वैवाहिक जीवन में सौहार्द बढ़ता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।
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