स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डिजिटल न्यूज़ डेस्क
हाइलाइट बॉक्स:
- बिहार विधानसभा चुनाव में 6 और 11 नवंबर को मतदान, नतीजे 14 नवंबर को आएंगे।
- दो पूर्व आईपीएस अधिकारी — शिवदीप लांडे (जमालपुर से निर्दलीय) और आनंद मिश्रा (बक्सर से भाजपा उम्मीदवार) — मैदान में।
- दोनों को मिला ‘सिंघम’ का खिताब, दोनों का पुलिस करियर रहा बहादुरी और सख्त छवि से भरा।
- दोनों उम्मीदवारों की करोड़ों की संपत्ति और साफ छवि चर्चा में।
बिहार चुनाव में ‘सिंघम स्टाइल’ मुकाबला, दो पूर्व आईपीएस अधिकारी आमने-सामने
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का राजनीतिक माहौल गर्म हो चुका है। इस बार की सबसे चर्चित बात यह है कि दो पूर्व आईपीएस अधिकारी — शिवदीप लांडे और आनंद मिश्रा — अपनी साहसी पुलिसिंग और सख्त छवि के साथ मैदान में उतर चुके हैं। 6 और 11 नवंबर को होने वाले मतदान में जनता का रुझान इन दोनों “सिंघम अधिकारियों” की ओर खासा देखने को मिल रहा है।
शिवदीप लांडे और आनंद मिश्रा दोनों को उनके करियर के दौरान जनता और सहकर्मियों ने “सिंघम” की उपाधि दी थी — लांडे को बिहार में और मिश्रा को असम में। दोनों ने पुलिस सेवा में अपने साहसिक निर्णयों, ईमानदारी और अपराध के खिलाफ सख्त रुख के लिए लोकप्रियता हासिल की थी। अब दोनों का लक्ष्य है जनता की सेवा राजनीति के माध्यम से जारी रखना।
जमालपुर से निर्दलीय उम्मीदवार शिवदीप लांडे: सख्त छवि और ईमानदार छवि वाले पूर्व आईपीएस
49 वर्षीय शिवदीप लांडे महाराष्ट्र के अकोला जिले के किसान परिवार से आते हैं। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक लांडे 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। उन्होंने पटना एसपी, तिरहुत डीआईजी और पूर्णिया के आईजी के रूप में काम किया। पटना में एसपी रहते हुए उन्होंने छेड़छाड़ और सड़क अपराधों पर जिस सख्ती से कार्रवाई की, उसी से उन्हें जनता का प्यार और “सिंघम लांडे” की पहचान मिली।
पिछले साल 19 सितंबर को उन्होंने पूर्णिया में आईजी पद से इस्तीफा दिया और मार्च 2025 में जमालपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने की घोषणा की। अपनी राजनीतिक पार्टी “हिंदू सेना” बनाते हुए लांडे ने कहा था — “मैं पुलिस सेवा का अनुशासन और ईमानदारी राजनीति में लाना चाहता हूँ।”
उनके हलफनामे के अनुसार लांडे की कुल संपत्ति 20.74 लाख रुपये है, जबकि उनकी पत्नी ममता शिवतारे लांडे — जो महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री विजय शिवतारे की बेटी हैं — के पास 20.5 करोड़ रुपये की संपत्ति है। उनके पास दो लग्जरी एसयूवी (60 लाख की लैंड क्रूजर और 29 लाख की स्कॉर्पियो), मुंबई और पुणे में संपत्तियाँ, 17 एकड़ कृषि भूमि और कई बैंक शेयर हैं। परिवार पर लगभग 2.7 करोड़ रुपये का ऋण भी दर्ज है।
बक्सर से भाजपा उम्मीदवार आनंद मिश्रा: नशा विरोधी अभियानों से ‘सिंघम’ बनी पहचान
दूसरी ओर, 44 वर्षीय आनंद मिश्रा बिहार के बक्सर जिले के जिगना गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता परमहंस मिश्रा कोलकाता की हिंदुस्तान मोटर्स कंपनी में कार्यरत थे। आनंद मिश्रा ने कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक और उस्मानिया विश्वविद्यालय से पुलिस प्रबंधन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की।
असम कैडर के आईपीएस अधिकारी के रूप में मिश्रा ने नागांव जिले में नशा माफिया और आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कई साहसिक अभियानों का नेतृत्व किया। उन्हें राष्ट्रपति का वीरता पदक, मुख्यमंत्री का उत्कृष्ट सेवा पुरस्कार और गृह मंत्रालय का आंतरिक सुरक्षा पदक मिल चुका है।
पिछले साल जनवरी में इस्तीफा देने के बाद मिश्रा ने राजनीति में कदम रखा। भाजपा का टिकट न मिलने पर उन्होंने निर्दलीय के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा और करीब 47,000 वोट हासिल किए। इसके बाद उन्होंने प्रशांत किशोर की जन सुराज पहल से जुड़कर कुछ समय बाद अलग हो गए और अगस्त 2025 में भाजपा में शामिल हो गए।
अब वे बक्सर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार हैं। उनके हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 2.5 करोड़ रुपये है। उनके पास 100 ग्राम सोना, 2.51 लाख की रॉयल एनफील्ड बाइक और हुगली (पश्चिम बंगाल) में 60 लाख रुपये का घर है। उनकी पत्नी अर्चना तिवारी के पास करीब 88 लाख रुपये की चल और 17 लाख रुपये की अचल संपत्ति है।
जनता की नज़र ‘सिंघम बनाम सिंघम’ मुकाबले पर
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में इस बार “सिंघम बनाम सिंघम” का चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प रहने वाला है। दोनों उम्मीदवारों की छवि ईमानदार और सख्त अधिकारी के रूप में जनता के बीच गहरी पैठ रखती है। जहाँ लांडे अपने अनुशासन और समाजसेवी छवि के साथ मैदान में हैं, वहीं आनंद मिश्रा भाजपा संगठन और जनता के बीच अपने पुलिस कार्यकाल के साहसिक रिकॉर्ड को लेकर लोकप्रिय हैं।
बिहार चुनाव 2025 में जनता के लिए यह दिलचस्प स्थिति है कि दो “सिंघम” अधिकारी अपने अपने क्षेत्र में चुनावी दंगल में उतर चुके हैं। जहाँ एक ओर शिवदीप लांडे अपने अनुशासन और जनता से जुड़ाव पर भरोसा कर रहे हैं, वहीं आनंद मिश्रा पार्टी संगठन और अपनी सख्त छवि के सहारे मैदान में हैं। आने वाले 14 नवंबर को पता चलेगा कि जनता किस “सिंघम” पर विश्वास जताती है।


