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Thursday, May 7, 2026

बस्तर की धरती से गूँजी संस्कृति और विकास की गाथा, सरदार पटेल जयंती पर ‘एकता परेड’ में छत्तीसगढ़ की झांकी ने जीता देश का दिल…

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मुख्य आकर्षण

  • एकता नगर, गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर भव्य ‘एकता परेड’ का आयोजन
  • छत्तीसगढ़ की झांकी “बस्तर की धरती – संस्कृति, सृजन और प्रगति की गाथा” रही सभी की नज़रों का केंद्र
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झांकी का अवलोकन कर बस्तर की सांस्कृतिक झलकियों की सराहना की
  • झांकी ने दिखाया नया बस्तर — जहाँ परंपरा, प्रकृति और प्रगति का अद्भुत संगम नजर आया

एकता परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी ने लहराया सांस्कृतिक परचम

गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित भव्य ‘एकता परेड’ में इस वर्ष छत्तीसगढ़ की झांकी ने पूरे देश का दिल जीत लिया। “बस्तर की धरती – संस्कृति, सृजन और प्रगति की गाथा” थीम पर सजी यह झांकी छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराओं, जीवनशैली और विकास की यात्रा का जीवंत चित्रण थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं सभी झांकियों का अवलोकन किया और बस्तर की सांस्कृतिक झलकियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता और एकता में निहित है।


गौर नृत्य ने दिखाई बस्तर की असली पहचान

झांकी के अग्रभाग में माड़िया जनजाति के कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में गौर नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने पूरे मंच को बस्तर की लोकधुनों से भर दिया। कलाकारों के पास रखी पारंपरिक तुरही बस्तर के पर्वों और उत्सवों की गूंज का प्रतीक बनी। वहीं नंदी की मूर्ति ने बस्तर की शिव उपासना और लोक आस्था को दर्शाया। इस भाग ने यह दिखाया कि बस्तर की जड़ें कितनी गहराई से परंपरा में बसी हैं, फिर भी उसमें आधुनिकता का संतुलित मेल है।


विकास की राह पर तेज़ी से बढ़ता नया बस्तर

झांकी के मध्य भाग में बस्तर के बदलते स्वरूप को बेहद कलात्मक ढंग से दर्शाया गया। कभी नक्सल प्रभावित यह क्षेत्र आज शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोज़गार के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की योजनाओं और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में बस्तर अब प्रगति की राह पर है। गाँवों में बिजली की रोशनी, इंटरनेट की पहुँच, स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल और महिलाओं की आत्मनिर्भरता आज के नए बस्तर की नई कहानी कहती है। अब यहाँ बंदूक की आवाज़ नहीं, बल्कि विकास की धुन सुनाई देती है।


स्त्री शक्ति और सृजन का प्रतीक

झांकी के अंतिम हिस्से में टोकरी लिए महिला की प्रतिमा ने बस्तर की स्त्री शक्ति, श्रम और सृजनशीलता को उजागर किया। ढोकरा कला से सजी झांकी ने छत्तीसगढ़ के शिल्पकारों की असाधारण प्रतिभा को प्रदर्शित किया। यह दृश्य न केवल बस्तर की सांस्कृतिक समृद्धि का दर्पण बना, बल्कि यह संदेश भी दिया कि आज बस्तर की महिलाएँ अपनी मेहनत और रचनात्मकता से परिवार और समाज को नई दिशा दे रही हैं।


चयन प्रक्रिया और राष्ट्रीय गौरव

‘एकता परेड’ में झांकियों का चयन गृह सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति द्वारा किया गया। देशभर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी-अपनी थीम और मॉडल प्रस्तुत किए। छत्तीसगढ़ की झांकी को उसकी मौलिकता, सांस्कृतिक विविधता और विकास के जीवंत चित्रण के लिए चुना गया। अंतिम सूची में छत्तीसगढ़ के साथ एनएसजी, एनडीआरएफ, अंडमान-निकोबार, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, मणिपुर, पुद्दुचेरी और उत्तराखंड की झांकियाँ शामिल रहीं।


निष्कर्ष

एकता नगर की परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी ने यह संदेश दिया कि भारत की एकता उसकी विविधता में निहित है। बस्तर की धरती से उठी यह झांकी केवल परंपरा और संस्कृति की गाथा नहीं थी, बल्कि यह प्रमाण थी कि संघर्षों से जूझा इलाका आज आत्मनिर्भरता, शिक्षा और नवाचार का प्रतीक बन चुका है। यह झांकी सचमुच “नए भारत के नए बस्तर” की कहानी कहती है — जहाँ परंपरा की जड़ें गहरी हैं और विकास की उड़ान असीमित।

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