ढाका : 03 जुलाई 2025
बुधवार को बांग्लादेश की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की प्रमुख शेख हसीना को अदालत की अवमानना के मामले में छह महीने की सजा सुनाई। यह फैसला सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक ऑडियो क्लिप के आधार पर आया, जिसमें कथित तौर पर हसीना को न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करते और ट्राइब्यूनल को धमकाते सुना गया था।
क्या है मामला?
यह ऑडियो क्लिप इंटरनेट पर व्यापक रूप से वायरल हुई थी और इसके आधार पर ट्राइब्यूनल ने पिछले महीने शेख हसीना और छात्र लीग नेता शकील अकांडा बुलबुल को शो-कॉज नोटिस जारी किया था। गौरतलब है कि शेख हसीना अगस्त 2024 में देश छोड़कर चली गई थीं, और उनके विदेश में होने के बावजूद अदालत ने यह सजा सुनाई। तीन सदस्यीय पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति गोलाम मुर्तुजा माजुमदार ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा न्यायिक संस्थानों को धमकाना या दबाव में लेने की कोशिश लोकतंत्र और न्याय प्रक्रिया के लिए घातक है। इसी मामले में शकील बुलबुल को भी दो महीने की सजा दी गई।
अवामी लीग की तीखी प्रतिक्रिया
अवामी लीग ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है और इसे एक “शो ट्रायल” (नकली मुकदमा) करार दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह सत्तारूढ़ अंतरिम सरकार द्वारा सुनियोजित राजनीतिक प्रतिशोध है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की उस चेतावनी का भी हवाला दिया जिसमें ICT की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर चिंता जताई गई थी। अवामी लीग नेताओं का कहना है कि प्रशासन ने केवल पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को ही निशाना बनाया है, जबकि देश में पत्रकारों, महिलाओं, धार्मिक अल्पसंख्यकों और आम नागरिकों पर हो रहे हमलों की अनदेखी की जा रही है।
ट्राइब्यूनल का ऐतिहासिक संदर्भ
यह वही ट्राइब्यूनल है जिसकी स्थापना शेख हसीना सरकार ने 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना और उनके स्थानीय सहयोगियों द्वारा किए गए युद्ध अपराधों की जांच और सजा के लिए की थी। ironical रूप से, आज उसी ट्राइब्यूनल में शेख हसीना को दोषी ठहराया गया है।
राजनीतिक विश्लेषण: सत्ता संघर्ष का एक अध्याय?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सजा कार्यवाहक प्रधानमंत्री मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा शेख हसीना और उनकी पार्टी के खिलाफ चलाए जा रहे राजनीतिक अभियान का हिस्सा है। विश्लेषकों के अनुसार, हसीना की सत्ता से बेदखली के तुरंत बाद उनके खिलाफ एक के बाद एक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। यह भी कहा जा रहा है कि हसीना के खिलाफ माहौल पहले से ही तैयार कर लिया गया था, क्योंकि कई सरकारी अधिकारी पहले ही उन्हें सार्वजनिक मंचों से दोषी करार दे चुके थे, जिससे निष्पक्ष सुनवाई की संभावना समाप्त हो गई थी।
शेख हसीना: लोकतंत्र की मुखर आवाज
शेख हसीना, बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान की बेटी हैं। उन्होंने दशकों तक देश की राजनीति में एक मजबूत नेता के रूप में भूमिका निभाई और लोकतंत्र की बहाली के लिए लगातार संघर्ष किया। हसीना को बांग्लादेश में लोकतांत्रिक व्यवस्था और धर्मनिरपेक्षता की रक्षक माना जाता रहा है।
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