श्रीहरिकोटा /आँध्रप्रदेश
भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने एक बार फिर अपनी वैज्ञानिक क्षमता का लोहा मनवाते हुए LVM-3 रॉकेट की सफल लॉन्चिंग कर अंतरिक्ष क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से हुए इस प्रक्षेपण को देखने के लिए वैज्ञानिकों में खासा उत्साह था। लॉन्च के साथ ही मिशन कंट्रोल सेंटर में तालियों की गूंज सुनाई दी, वैज्ञानिकों ने एक-दूसरे को बधाई दी और इस सफलता को देश के लिए गौरवपूर्ण बताया। LVM-3, जिसे भारत का सबसे भारी और विश्वसनीय प्रक्षेपण यान माना जाता है, ने निर्धारित समय पर उड़ान भरते हुए अपने मिशन को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया।
वैज्ञानिक प्रगति की नई उड़ान, आत्मनिर्भर अंतरिक्ष कार्यक्रम को मिला बल
LVM-3 रॉकेट की यह लॉन्चिंग भारत के आत्मनिर्भर अंतरिक्ष कार्यक्रम को और अधिक सशक्त बनाती है। इस रॉकेट को भारी उपग्रहों को जियो-सिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और यह पहले भी कई जटिल मिशनों में अपनी क्षमता साबित कर चुका है। इस मिशन के सफल प्रक्षेपण से भारत की व्यावसायिक अंतरिक्ष लॉन्च सेवाओं में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण बाज़ार में ISRO की हिस्सेदारी और मजबूत होगी। अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में अग्रणी देशों की पंक्ति में और आगे ले जाएगी।
दुनिया पर असर, भारत की अंतरिक्ष कूटनीति और तकनीकी नेतृत्व को मिली नई पहचान
इस ऐतिहास्विक प्रक्षेपण का प्रभाव केवल तकनीकी सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की अंतरिक्ष कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व को भी नई पहचान देता है। ISRO की यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं और भविष्य की अंतरिक्ष योजनाओं के लिए नए द्वार खोलती है। वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मिशन युवाओं को विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में प्रेरित करेगा। देशभर से शिक्षकों, छात्रों और नागरिकों ने इस सफलता पर गर्व जताया और इसे ‘नए भारत की नई उड़ान’ बताया।
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