नई दिल्ली
हाइलाइट राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की रचना को 150 वर्ष पूरे—लोकसभा में 10 घंटे की विशेष बहस तय । प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे । विपक्ष ने टाइमिंग पर उठाए सवाल , सरकार ने इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया । शीतकालीन सत्र में यह चर्चा राजनीतिक तापमान बढ़ाने वाली मानी जा रही है ।
राष्ट्रगीत के 150 साल—संसद में विशेष चर्चा की तैयारी संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो चुका है और इसी बीच राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर लोकसभा में एक विशेष चर्चा आयोजित करने का फैसला हुआ है । यह बहस इस हफ्ते गुरुवार या शुक्रवार को रखे जाने की संभावना है , जिसके लिए कुल 10 घंटे निर्धारित किए गए हैं । संसद सूत्रों के अनुसार इस ऐतिहासिक चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हिस्सा लेंगे , जिससे राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है । लोकसभा की बिज़नेस एडवाइजरी कमेटी BAC की बैठक में सरकार ने इस विषय को प्राथमिकता दी , जबकि कांग्रेस ने चुनावी सुधारों और SIR मुद्दे पर बहस की मांग की । हालांकि , टीएमसी ने ‘वंदे मातरम’ पर विशेष चर्चा का समर्थन किया है ।
सर्वदलीय सहमति—सरकार ने कहा , यह राष्ट्रीय एकता का प्रतीक 30 नवंबर को बुलाई गई ऑल-पार्टी मीटिंग और BAC की बैठकों में इस प्रस्ताव पर व्यापक सहमति बनी । राज्यसभा के सदस्यों ने भी इस पहल को मजबूत समर्थन दिया । संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सरकार ने सभी दलों को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया है क्योंकि “वंदे मातरम सिर्फ गीत नहीं , बल्कि राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा है ।” प्रधानमंत्री मोदी सरकार पहले ही राष्ट्रव्यापी प्रतियोगिता शुरू कर चुकी है जिसमें नागरिकों से ‘वंदे मातरम’ को अपने अनूठे अंदाज़ में प्रस्तुत करने का आग्रह किया गया है ।
विपक्ष ने उठाए सवाल—क्या चुनावी सुधारों से ध्यान भटकाना है ? विपक्षी दलों ने इस बहस की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार SIR मुद्दे और चुनावी सुधारों पर चर्चा से बच रही है । कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार “भावनात्मक मुद्दे उठाकर अहम सवालों को टालना चाहती है ।” TMC हालांकि इस बहस को सही मानते हुए लोकसभा में इसके समर्थन में खड़ी दिखी । BJP ने विपक्ष पर पलटवार किया कि “वंदे मातरम के 150 साल का महत्व नकारा नहीं जा सकता—यह राजनीति से ऊपर का विषय है ।”
पीएम मोदी का तीखा बयान—“संसद ड्रामा की जगह नहीं” हाल ही में संसद में संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष को निशाने पर लेते हुए कहा कि संसद “काम करने की जगह है , न कि चुनावी हार की हताशा जताने का मंच ।” उनके इस बयान के बाद शीतकालीन सत्र का माहौल और गरम हो गया है ।
‘वंदे मातरम’—स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरक धुन वंदे मातरम को 1950 में भारत गणराज्य के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया था । इसे 1870 के दशक में बंकिम चंद्र चटर्जी ने संस्कृतनिष्ठ बंगाली भाषा में लिखा था । यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा है , जो 1882 में प्रकाशित हुआ । यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों , छात्रों , आंदोलनकारियों और देशभक्तों का मनोबल बढ़ाने वाला एक प्रमुख मंत्र था । 150वीं वर्षगांठ पर केंद्र सरकार पहले ही विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी कर चुकी है । प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से राष्ट्रगीत को अपनाने और इसका गान करने की अपील भी की थी ।
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