जांजगीर -चांपा /छत्तीसगढ़
हाइलाइट पीएम मोदी की “पुलिस की छवि सुधारने” वाली टिप्पणी के बाद भी जांजगीर में हालात उलट दिशा में जाते दिख रहे हैं । नौ महीने बीत गए , पर 78 लाख लूटकांड और गोलीकांड में पुलिस पूरी तरह खाली हाथ । खेतों में हर शाम लाखों के जुए की महफिलें , वायरल वीडियो में संगठित जुआ नेटवर्क का खुलासा । दो एसपी , कई जिलों में दबिश , पांच लाख इनाम… इसके बावजूद आरोपी फरार । ग्रामीणों में गहरी चिंता—“गश्त के बाद भी जुआ रुक नहीं रहा , बस जगह बदल रहा है ।”
पीएम की सलाह और जमीनी हकीकत—जांजगीर का हाल क्यों नहीं सुधर रहा ? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायपुर में आयोजित 60वीं अखिल भारतीय डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस के दौरान साफ कहा था कि पुलिस को जनता का भरोसा जीतना होगा और अपनी छवि बेहतर बनानी होगी । यह बयान पूरे देश की पुलिसिंग व्यवस्था के लिए स्पष्ट संकेत था , लेकिन जांजगीर-चांपा की मौजूदा स्थिति इस सलाह को व्यावहारिक रूप में उलटती नजर आती है । न सवाल हल हुए , न नेटवर्क टूटा—और जनता के धैर्य की परीक्षा लगातार जारी है ।
खेतों में शाम ढलते ही शुरू हो जाती है लाखों की जुआबाज़ी जिले के पिसौद , पीथमपुर , उदयबन और आसपास के खेतों में रोजाना शाम चार बजे के बाद जुआ फड़ सक्रिय हो जाते हैं । ताश की गड्डियां खुलती हैं , दांव पर मोटी रकम लगती है , और मोटरसाइकिलों की कतारें लंबी होती जाती हैं । वायरल वीडियो में साफ दिखता है कि जुआ सिर्फ लत नहीं , बल्कि एक संगठित नेटवर्क का रूप लेते जा रहा है । भले वीडियो की पुष्टि न हो , पर जुआ फड़ लगने की शिकायतें वर्षों से होती आई हैं । ग्रामीणों का कहना है—“पुलिस गश्त आती है , फड़ हट जाता है , फिर अगले दिन नए खेत में वही खेल ।”
कार्रवाई हुई , पर असर नहीं दिखा रमन नगर में अक्टूबर 2025 की बड़ी कार्रवाई—6 पटवारी समेत 8 जुआरी गिरफ्तार , लगभग 20 लाख रुपये बरामद पामगढ़ और चांपा क्षेत्र में सड़क किनारे व खेतों से कई गिरफ़्तारियाँ पीथमपुर में 10 जुआरी पकड़े गए मुलमुला में चुनाव बाद जुआ फिर सक्रिय एसपी विजय पांडे ने गश्त बढ़ाई है , पर जुआ नेटवर्क उससे तेज़ी से जगह बदल लेता है । यह बताता है कि समस्या सतह पर नहीं—गहराई में है ।
78 लाख की लूट—नौ महीनों बाद भी पुलिस शून्य पर क्यों ? 14 जनवरी 2025 की शाम जांजगीर जिले में 78 लाख की सनसनीखेज लूट और गोलीकांड हुआ था । अपराधियों ने सरकारी शराब दुकान के सामने कलेक्शन टीम पर हमला कर गार्ड को गोली मारी और कैश लेकर फरार हो गए । नौ महीने बीत गए , पर न कोई सुराग , न आरोपी की पहचान , न नेटवर्क का खुलासा—सिर्फ फाइलों का भार बढ़ा ।
दो एसपी बदले , इनाम बढ़ा—पर नतीजा वही ‘शून्य’ तत्कालीन एसपी विवेक शुक्ला ने कई जिलों में दबिश दी IG ने निरीक्षण कर दिशा निर्देश दिए संदिग्धों का हुलिया जारी हुआ CCTV खंगाले गए पांच लाख रुपये तक इनाम बढ़ाया गया मई 2025 में नए एसपी विजय पांडे आए लेकिन आरोपियों का पता आज तक नहीं चल सका । एक स्थानीय व्यापारी ने कहा—“इतना बड़ा केस अनसुलझा रहना डराने वाला है । अगर ये नहीं सुलझा , तो जनता किस पर भरोसा करे ?”
जब बड़ा अपराध सुलझे नहीं और छोटा रुके नहीं—तो छवि सुधरे कैसे ? पुलिस की छवि प्रचार से नहीं , परिणामों से सुधरती है । अभी जांजगीर की तस्वीर उलटी है— बड़ा अपराध 78 लाख लूटकांड—अनसुलझा छोटा अपराध जुआ फड़—बेकाबू जनता का भरोसा—हिलता हुआ पीएम मोदी ने कहा था कि पुलिस को जनता का विश्वास जीतना चाहिए । लेकिन विश्वास न भाषण से लौटता है , न पोस्टर से—यह लौटता है सटीक कार्रवाई , नेटवर्क तोड़ने और ठोस नतीजे देने से ।
अब क्या करना होगा पुलिस को ? जांजगीर पुलिस के सामने दो मोर्चे हैं—दोनों जरूरी , दोनों चुनौतीपूर्ण । 78 लाख लूटकांड सुलझाना और आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करना जुआ नेटवर्क पर स्थायी , रणनीतिक और जड़-स्तर की कार्रवाई करना | इन्हीं दो मोर्चों पर निर्णायक सफलता ही वह रास्ता है जिससे जनता का भरोसा लौटेगा , और वह छवि सुधरेगी जिसकी बात प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर कही थी ।
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