रायपुर / छत्तीसगढ़
रायपुर। देशभर में ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और कई सामाजिक संगठनों द्वारा आहूत भारत बंद का असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल रहा है। विभिन्न संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में बंद का समर्थन किया है। प्रदेश के कई जिलों में प्रदर्शन और धरना कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। रायगढ़ जिले में कोयला खदानों के बंद रहने और परिवहन प्रभावित होने की सूचना है, जबकि चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस बंद को समर्थन नहीं दिया है।
यूनियनों के अनुसार यह हड़ताल श्रमिकों, कर्मचारियों और सार्वजनिक संस्थानों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से की जा रही है। रायपुर में कर्मचारी भवन बूढ़ापारा से मशाल रैली निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रमिक, कर्मचारी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए सभा में परिवर्तित हुई, जहां वक्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
रायगढ़ जिले में इंटक, एटक, सीटू और एचएमएस सहित अन्य यूनियनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल के समर्थन में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। एसईसीएल की छाल खदान के पास धरना दिया जा रहा है, वहीं कोल इंडिया की छाल, जामपाली, बरौद और बेजारी खदानों में काम प्रभावित रहने की बात कही गई है। खदानों के बंद रहने से कोयला परिवहन पर भी असर पड़ा है। हालांकि, स्कूलों और अधिकांश प्रतिष्ठानों में कामकाज सामान्य रूप से जारी रहने की जानकारी है। जीवन बीमा कार्यालय के पास भी एक दिवसीय धरना प्रदर्शन प्रस्तावित है।
संगठनों ने भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध, चार नए श्रम संहिताओं की वापसी, सरकारी उपक्रमों के निजीकरण पर रोक, पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, न्यूनतम वेतन में वृद्धि, निर्माण एवं बिजली क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा और कृषि नीतियों में बदलाव जैसी प्रमुख मांगें रखी हैं।
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