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Wednesday, February 11, 2026

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने पर दी बधाई…

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हाइलाइट बॉक्स: छत्तीसगढ़ के गौरव , वरिष्ठ साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को मिला 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले— “यह प्रदेश के लिए गर्व का क्षण” • पहली बार किसी छत्तीसगढ़ी साहित्यकार को मिला यह सर्वोच्च सम्मान

छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को मिला ज्ञानपीठ पुरस्कार रायपुर. छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार , कवि और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल को भारतीय साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है । यह पुरस्कार उन्हें उनके रायपुर स्थित निवास पर प्रदान किया गया । साहित्य जगत में यह क्षण अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण माना गया , क्योंकि छत्तीसगढ़ से पहली बार किसी साहित्यकार को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ है । उनकी मौलिक शैली , सूक्ष्म संवेदनशीलता और गहन मानवीय दृष्टि को लंबे समय से साहित्यिक संसार में विशिष्ट पहचान मिली है ।

सीएम साय ने कहा “यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात” मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ सम्मान मिलने पर हार्दिक बधाई दी है । उन्होंने कहा— “विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य की उस विराट परंपरा के प्रतिनिधि हैं , जिन्होंने सादगी , संवेदना और अद्भुत लेखन-शक्ति से पाठकों की पीढ़ियों को प्रभावित किया है । यह सम्मान साहित्य में उनके अनुकरणीय योगदान का प्रमाण है ।” सीएम ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा— “छत्तीसगढ़ के गौरव और देश के शीर्ष कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके रायपुर निवास पर प्रदान किया गया । उन्हें हार्दिक बधाई । हम उनके सुदीर्घ और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं ।” लोगों में भी इस सम्मान को लेकर उत्साह देखने को मिला और सोशल मीडिया पर लगातार बधाइयों का सिलसिला चलता रहा । “

कभी नहीं लगा कि यह पुरस्कार मिलेगा” विनोद कुमार शुक्ल मार्च 2025 में पुरस्कार की घोषणा के बाद एक बातचीत में विनोद कुमार शुक्ल ने कहा था— “मुझे कभी नहीं लगा कि यह पुरस्कार मुझे मिलेगा । यह भारत का बहुत बड़ा पुरस्कार है । इतना बड़ा सम्मान मिलना मेरे लिए खुशी की बात है ।”

उन्होंने अपनी लेखन प्रक्रिया पर बात करते हुए स्वतंत्र छत्तीसगढ़ से कहा— “मुझे लिखना बहुत था , पर लिख पाया बहुत कम । देखा भी बहुत , सुना भी बहुत , महसूस भी बहुत किया , पर लिखा थोड़ा । कितना कुछ लिखना बाकी है… जब सोचता हूं , तो लगता है कि बहुत बाकी है । जो बचा है , उसे मैं लिख सकूं , अपने बचे होने तक ।” उनके ये शब्द साहित्य को लेकर उनकी विनम्रता , गहराई और निरंतर सृजनशील ऊर्जा को दर्शाते हैं ।

साहित्य की दुनिया में विनोद कुमार शुक्ल का योगदान विनोद कुमार शुक्ल को आधुनिक हिंदी साहित्य का एक अत्यंत मौलिक स्वर माना जाता है । उनकी प्रमुख कृतियों में “दीवार में एक खिड़की रहती थी” , “नौकर की कमीज़” , “हरना , जीतना और एक दिन” , “सफेद रात” जैसी पुस्तकें शामिल हैं । उनकी लेखनी में ग्रामीण जीवन , मानवीय संबंधों की बारीकियाँ , और गहन संवेदना आज भी पाठकों को छूती है । साहित्यकारों का मानना है कि ज्ञानपीठ पुरस्कार ने हिंदी कथा-साहित्य के उस लंबे सफर को सम्मानित किया है , जिसमें विनोद कुमार शुक्ल ने अपनी अनूठी शैली से एक नया अध्याय जोड़ा ।

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