स्वतंत्र छत्तीसगढ़
गुवाहाटी : 13 सितम्बर 2025— गुवाहाटी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT Guwahati) के शोधकर्ताओं ने इंसुलिन उत्पादन की एक नई पद्धति विकसित की है, जिससे मधुमेह के मरीजों को सस्ती और सुलभ इंसुलिन मिल सकेगी।
संस्थान की ओर से जारी बयान में बताया गया कि इस तकनीक में स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस (Pseudomonas fluorescens) नामक एक सुरक्षित और प्रभावी जीवाणु प्रणाली का उपयोग किया गया है। इस खोज को दो भारतीय पेटेंट मिल चुके हैं और इसके नतीजे इंटरनैशनल जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल मैक्रोमोलेक्यूल्स और जर्नल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।
इस शोध का नेतृत्व IIT गुवाहाटी के जैव विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर और पूर्व प्रमुख प्रो. वीरंकी वेंकट दासू ने किया है। वे आंध्र प्रदेश के राजीव गांधी ज्ञान प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, नुजविद के पूर्व निदेशक भी रह चुके हैं।
डायबिटीज़—सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती
फिलहाल विश्वभर में लगभग 53.7 करोड़ वयस्क मधुमेह से पीड़ित हैं। विशेषकर टाइप-1 और कई टाइप-2 मधुमेह रोगियों के लिए इंसुलिन जीवनरक्षक हार्मोन है।
वर्तमान उत्पादन पद्धति महंगी
हालांकि इंसुलिन की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन मौजूदा उत्पादन तकनीकें महंगी और जटिल हैं। नई तकनीक में जेनेटिक, मेटाबॉलिक और बायोकेमिकल इंजीनियरिंग दृष्टिकोण अपनाते हुए एक बायोप्रोसेसिंग तकनीक विकसित की गई है, जो सस्ती और अधिक प्रभावी इंसुलिन उत्पादन में मददगार साबित हो सकती है। इस उपलब्धि से भविष्य में लाखों डायबिटीज़ मरीजों को किफायती दर पर इंसुलिन मिलना संभव हो पाएगा।
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