उज्जैन : 16 जुलाई 2025
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के कपाट बुधवार तड़के पवित्र भस्म आरती के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। अलसुबह मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण और भक्तिमय भावनाओं के बीच यह दिव्य अनुष्ठान संपन्न हुआ।
परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया और आज्ञा प्राप्त कर चांदी द्वार खोला गया। इसके बाद गर्भगृह के कपाट खोले गए, जहाँ पुजारियों ने भगवान महाकाल का श्रृंगार उतारकर पंचामृत पूजन किया। कर्पूर आरती के बाद भगवान को भांग, चंदन, सिंदूर और आभूषणों से गणेश स्वरूप में श्रृंगारित किया गया।
नंदी हाल में स्थित नंदी महाराज का विधिवत स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। तत्पश्चात भगवान महाकाल का जल से अभिषेक कर दूध, दही, घी, शकर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन हुआ। भगवान को ड्रायफ्रूट, फल और मिठाइयों का भोग अर्पित किया गया।
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इसके उपरांत भस्म अर्पण की विधि पूर्ण हुई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म चढ़ाई गई। भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला धारण की।
भस्म आरती में देश-विदेश से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और बाबा महाकाल का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
भक्तों के अनुसार, महाकाल की इस आरती में भाग लेना उनके लिए जीवन का सबसे दिव्य अनुभव है। मंदिर प्रबंधन ने भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए थे।
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