कोरबा : 15 जुलाई 2025
वन विभाग की 10 करोड़ रुपये की पौधारोपण योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। वर्ष 2019-20 में कैम्पा मद से स्वीकृत इस परियोजना में भारी अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जांच में पता चला कि अधिकांश काम केवल कागजों पर किए गए और मौके पर पौधे तक नहीं मिले। अब जांच समिति ने 45.32 लाख रुपये की वसूली की सिफारिश की है।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
पाली SDO चंद्रकांत टिकरिहा की अगुवाई में गठित जांच दल की रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश से मजदूर बुलाकर केवल दिखावे के लिए रोपण कराया गया। जमीन पर न पौधे थे, न फेंसिंग, न ही पानी-बिजली की व्यवस्था। बोरवेल खुदवाए गए लेकिन बिजली कनेक्शन तक नहीं था। मौके पर 150 हेक्टेयर में 88,000 पौधों के रोपण का दावा किया गया, लेकिन केवल 20-30% पौधे जीवित पाए गए।
भूमि घपला और अधूरी सुविधाएं
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि परियोजना में 265 हेक्टेयर भूमि दर्शाई गई, लेकिन वास्तव में रकबा कम निकला। कुछ अतिक्रमित जमीन को भी शामिल कर दस्तावेजों में हेराफेरी की गई। पाइपलाइन, पंप, बिजली कनेक्शन जैसी जरूरी सुविधाएं अधूरी थीं।
इनसे होगी वसूली
| अधिकारी का नाम | पद | वसूली राशि |
|---|---|---|
| एआर बंजारे | रिटायर्ड SDO | ₹11.33 लाख |
| धर्मेन्द्र चौहान | रेंजर | ₹15.86 लाख |
| एसएस तिवारी | वनपाल | ₹11.33 लाख |
| दिलीप ओरेकरा | वन रक्षक | ₹18,568 |
| सुरेश यादव | वन रक्षक | ₹1.21 लाख |
| एपी सोनी | अधिकारी | ₹4.50 लाख |
| एके शुक्ला | कर्मचारी | ₹89,983 |
पर्यावरण को भी नुकसान
इस योजना के तहत आंवला, जामुन, नीम, करंज, सागौन, महुआ, बीजा आदि पौधों का रोपण किया गया था। लेकिन अब तीन साल बाद इनमें से अधिकांश पौधे खत्म हो चुके हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण को भी गहरा नुकसान पहुंचा है।
जांच रिपोर्ट राज्य शासन को सौंप दी गई है। अब सभी की निगाहें इस पर हैं कि दोषियों पर कब और क्या कार्रवाई होती है।
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