रायपुर : 15 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को जल जीवन मिशन को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और विधायक भूपेश बघेल ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार केवल आंकड़ों का भ्रम फैलाकर असल तस्वीर छुपा रही है।
भूपेश बघेल ने वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के दौरान खर्च की गई राशि और घरों में दिए गए जल कनेक्शन की जानकारी मांगी। उन्होंने दावा किया कि कई जिलों में नाम मात्र की राशि खर्च की गई है और योजना महज कागजों पर चल रही है।
इस पर डिप्टी सीएम एवं जल संसाधन मंत्री अरुण साव ने जवाब देते हुए कहा कि अब तक ₹15,045 करोड़ यानी कुल 57% राशि खर्च की जा चुकी है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य के 31,16,398 घरों में नल से जल पहुंचाया गया है, और 3,836 गांवों में शत-प्रतिशत जलापूर्ति की जा चुकी है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि राशि का आवंटन जिलों की प्रगति के आधार पर किया जाता है।
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बघेल का पलटवार
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट भूपेश बघेल ने तंज कसा, “हमारी सरकार ने 21 लाख घरों तक जल पहुंचाया था, जबकि डबल इंजन की सरकार दो साल में केवल 10 लाख घर जोड़ पाई है। क्या यही विकास की गति है?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार नल तो लगा रही है, लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा, जिससे लोगों को कोई लाभ नहीं मिल रहा।
विपक्ष का वॉकआउट
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जल जीवन मिशन का 74% कार्य पूरा हो चुका था, जबकि वर्तमान सरकार ने 20 महीनों में सिर्फ 7% प्रगति की है। उन्होंने मंत्री के जवाब को भ्रामक और तथ्यों से परे बताते हुए आपत्ति जताई। इसके बाद विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
जल जीवन मिशन बना सियासी जंग का मुद्दा
विधानसभा में हुई इस तीखी बहस से स्पष्ट है कि जल जीवन मिशन अब केवल विकास योजना न रहकर राजनीतिक बहस का मुख्य मुद्दा बन गया है। विपक्ष सरकार को आंकड़ों के सहारे घेरने में जुटा है, वहीं सरकार दावा कर रही है कि योजनागत प्रगति धरातल पर दिख रही है।
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