जबलपुर : 12 जुलाई 2025
मध्यप्रदेश में पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जबलपुर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश के कई सरकारी और निजी कॉलेजों को बिना जांच और प्रक्रिया के मान्यता दे दी गई है। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए याचिका स्वीकार की है और मध्यप्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल के चेयरमैन व रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं।
यह याचिका लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा नर्सिंग घोटाले से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पेश की गई। याचिका में बताया गया कि सत्र 2023-24 और 2024-25 में कई कॉलेजों को बिना भौतिक निरीक्षण के मान्यता दे दी गई। इतना ही नहीं, कई कॉलेजों द्वारा बिना विश्वविद्यालय से संबद्धता लिए ही छात्रों को दाखिला दिया जा रहा है।
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चौंकाने वाली बात यह है कि जिन कॉलेजों को नर्सिंग घोटाले में सीबीआई ने “अनसूटेबल” घोषित किया था, उन्हीं भवनों में अब पैरामेडिकल कॉलेज संचालित किए जा रहे हैं और उन्हें भी मान्यता दे दी गई है।
हाईकोर्ट ने इस मामले को जनहित याचिका के रूप में पंजीबद्ध करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 16 जुलाई को तय की है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ. राजेंद्र शुक्ला पैरामेडिकल काउंसिल के पदेन चेयरमैन हैं।
अब इस मामले में हाईकोर्ट की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मसला बन गया है।
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