कोरबा : 02 जुलाई 2025
एसईसीएल (SECL) की दीपका विस्तार परियोजना के तहत ग्राम मलगांव में 152 मकान ‘काल्पनिक’ पाए गए हैं। ये मकान मुआवजा सूची में दर्ज तो थे, लेकिन जमीन पर मौजूद ही नहीं हैं। मामला तब सामने आया जब मई 2025 में गांव में विस्थापन की प्रक्रिया शुरू हुई।
जिला प्रशासन के मुताबिक, 2022-23 में की गई संपत्ति गणना में 1638 मकानों की माप पुस्तिका (Measurement Book) तैयार की गई थी। मगर विस्थापन के दौरान SECL और राजस्व विभाग की जांच में पता चला कि 78 मकान मौके पर नहीं हैं। वहीं गूगल अर्थ की 2018–2022 की तस्वीरों से 74 और मकान भी फर्जी पाए गए। कुल मिलाकर 152 मकान वास्तव में कभी बने ही नहीं थे।
कटघोरा SDM रोहित सिंह ने SECL को मुआवजा रोकने और अगर भुगतान हो चुका हो तो 15 दिन में वसूली के निर्देश दिए हैं। साथ ही तीन दिन में पूरी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
ग्रामीणों की शिकायत पर इस मामले में CBI ने भी जांच शुरू की है। माना जा रहा है कि सर्वेक्षण टीम ने गड़बड़ी कर मुआवजा तय किया, जिसमें राजस्व और SECL अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है। सबसे अहम बात यह है कि कई फर्जी मालिक पहले ही मुआवजा ले चुके हैं, जबकि असली प्रभावित लोग आज भी इंतजार कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस पर है कि क्या दोषी अफसरों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
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