नई दिल्ली
मुख्य बिंदु:
• 30% टैक्स स्लैब की सीमा बढ़ाने की जोरदार मांग
• स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹1,50,000 तक करने की अपेक्षा
• सरचार्ज और डिडक्शन्स में राहत की उम्मीद
टैक्स स्लैब में बदलाव की लॉंगिंग
आगामी केंद्रीय बजट 2026 से मध्यम और उच्च आय वर्ग के करदाताओं को राहत देने की उम्मीद बढ़ चुकी है। पिछले बजट में ₹12.75 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री किया गया था, जिससे मध्यम वर्ग को लाभ मिला। अब 30% टैक्स स्लैब की वर्तमान थ्रेशोल्ड (जो फिलहाल लगभग ₹24 लाख से ऊपर आय पर लागू है) को बढ़ाकर ₹35 लाख या ₹50 लाख तक करने की मांग मिडिल-अप्पर क्लास के बीच प्रमुख रूप से उठ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव आयकर ढांचे को और अधिक करदाताओं-हितैषी बनाएगा और मिडिल क्लास पर टैक्स बोझ को कम करेगा।
राहत की और दी गई मांगें
मध्यम वर्ग की दूसरी बड़ी मांग स्टैंडर्ड डिडक्शन को वर्तमान ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1,50,000 करने की है, जिससे टैक्स-पेयर को अतिरिक्त राहत मिले। इसके साथ ही सरचार्ज रेट्स में कटौती, मेडिकल इंश्योरेंस, हाउस लोन EMI और बच्चों की शिक्षा से जुड़े डिडक्शन्स को भी नए टैक्स रिजीम में शामिल करने की मांग जोर पकड़ चुकी है। यदि ये सुझाव लागू होते हैं, तो 20-30 लाख आय वर्ग के करदाताओं की कर बचत में महत्वपूर्ण उछाल देखा जा सकता है। ऐसे प्रस्ताव सरकारी विचाराधीन हैं और 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इनमें से कई बदलावों के शामिल होने की व्यापक उम्मीद है।
बजट सत्र की रूपरेखा
केंद्रीय बजट सत्र 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अभिभाषण देंगी। इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करेंगी और फिर आम बजट पेश किया जाएगा। मिडिल क्लास की इन मांगों और अपेक्षाओं पर बजट पेश होने के बाद स्पष्ट रूप से प्रकाश डाला जाएगा, जिससे यह समझना सरल हो जाएगा कि करदाताओं को वास्तविक राहत कितनी मिलेगी।
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