अंबिकापुर/छत्तीसगढ़
राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के पहले पीजी बैच के 34 डॉक्टरों ने विशेषज्ञता हासिल की है। ये चिकित्सक अब प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और संस्थानों में अपनी सेवाएं देंगे, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार होगा।
34 चिकित्सक हुए विशेषज्ञ
अंबिकापुर: सरगुजा संभाग में आदिवासी आबादी अधिक होने के बावजूद, गरीब मरीजों को अक्सर समय पर इलाज नहीं मिल पाता और डॉक्टरों की कमी से सरकारी अस्पतालों में लंबा इंतजार करना पड़ता है। लेकिन अब यह स्थिति बदलने वाली है। राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के पहले पीजी बैच के 36 में से 34 चिकित्सकों ने विभिन्न विषयों में सफलता हासिल कर विशेषज्ञ डॉक्टर बन गए हैं। इन डॉक्टरों को प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों और संस्थानों में आवश्यकता अनुसार नियुक्त किया जाएगा।
विविध विभागों में विशेषज्ञता
इन 34 डॉक्टरों में एनाटॉमी से 1, एनेस्थीसिया से 6, नाक-कान-गला रोग से 3, मेडिसिन से 4, सर्जरी से 4, नेत्र रोग से 2, हड्डी रोग से 2, प्रिवेंटिव मेडिसिन से 2, शिशु रोग से 2, पैथोलॉजी से 2 और फार्मेकोलॉजी से 2 चिकित्सक शामिल हैं। 2022 में पहले बैच ने एडमिशन लेकर 3 साल तक अध्ययन किया और अब ये सभी विशेषज्ञ चिकित्सक अपने-अपने विभागों में सेवाएं देंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अविनाश मेश्राम ने बताया कि “पहले पीजी बैच के डॉक्टरों की सफलता मेडिकल कॉलेज के लिए बड़ी उपलब्धि है। ये विशेषज्ञ चिकित्सक अगले 2 साल तक छत्तीसगढ़ शासन के अस्पतालों में सेवाएं देंगे, जिससे प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा।” शासन की नीति के तहत, पीजी पास करने वाले छात्रों को अनिवार्य रूप से 2 साल तक राज्य में ड्यूटी करनी होती है, जिससे विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।
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