रायपुर/छत्तीसगढ़
हाईलाइट बॉक्स
2018 CAF भर्ती में 1786 पदों पर चयन के बाद 417 अभ्यर्थी वेटिंग में, 7 साल बाद भी नियुक्ति नहीं। CAF में 3000+ पद रिक्त, 250 से अधिक कैंडिडेट ओवर-एज। 13 दिन से 100+ परिवारों के साथ तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन, डिप्टी सीएम बंगले का घेराव। मंत्री विजय शर्मा का आश्वासन—CM साय से चर्चा व प्रतिनिधि मंडल बुलाकर फैसला।
उपेक्षा, रिक्तियां और सिस्टम पर सवाल
2018 में छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स (CAF) में 1786 पदों पर भर्ती निकली थी। भाजपा शासनकाल में मेरिट सूची के बाद 417 नामों की वेटिंग लिस्ट जारी हुई, लेकिन इन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि “पद खाली नहीं हैं।” बाद में मेडिकल अनफिट, इस्तीफों और अन्य कारणों से CAF में 3000 से अधिक पोस्ट रिक्त हो गईं, वहीं राज्य पुलिस बल में स्वीकृत 83,259 पदों में से 17,820 पद 10–15 साल से खाली हैं। सूबेदार के 80 में केवल 3 कार्यरत और कॉन्स्टेबल के 10,436 पद भी रिक्त हैं, जिससे पेट्रोलिंग, कानून व्यवस्था और अपराध जांच प्रभावित हो रही है। धरना स्थल पर मौजूद एक पिता ने कहा, “बच्चों ने देश की वर्दी के लिए मेहनत की, पर सिस्टम ने उन्हें 7 साल सिर्फ आश्वासनों की फाइलों में उलझा दिया।”
परिवार संग धरना और मानवीय पीड़ा
7 साल से नियुक्ति की आस में भटक रहे 417 में से 250 से अधिक अभ्यर्थी अब 36–40 वर्ष की उम्र में ओवर-एज हो चुके हैं, जबकि चयन के वक्त वे 28–32 वर्ष के थे। आय का कोई स्थिर साधन न होने से कई युवा मजदूरी कर घर चला रहे हैं। पिछले 13 दिनों से 100+ कैंडिडेट अपने परिवार, पत्नी-बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता के साथ रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान एक 6 महीने के बच्चे की तबीयत बिगड़ने की घटना ने प्रदर्शन को और संवेदनशील बना दिया। मेनका (बदला नाम) ने कहा, “शादी नौकरी के भरोसे हुई, अब न्याय की लड़ाई बच्चे की मुस्कान बचाने के लिए लड़नी पड़ रही है।” शनिवार को अभ्यर्थियों ने डिप्टी CM विजय शर्मा के बंगले का घेराव किया, जिसके बाद मंत्री ने CM विष्णु देव साय के दिल्ली से लौटते ही चर्चा और प्रतिनिधि मंडल बुलाने का आश्वासन दिया।
सुरक्षा बल, जांच लंबित और समाधान की राह
रिक्त पदों की वजह से अपराध जांच की गति बाधित है—2024 में रायपुर जिले में 17,693 अपराध दर्ज हुए, जिनमें जनवरी 2025 तक 1,713 केस पेंडिंग थे। अक्टूबर 2024 में SI, सूबेदार, प्लाटून कमांडर, साइबर/कंप्यूटर सहित 341 पदों पर भर्ती निकली, पर प्रक्रिया अब तक अधूरी है और कॉन्स्टेबल भर्ती भी लंबित है। नियमों के अनुसार, नई वैकेंसी न आने तक वेटिंग लिस्ट वैध मानी जाती है और शासन चाहे तो रिक्त पदों पर समायोजन कर सकता है। “हम नक्सली नहीं, संविधान के बेटे-बेटियां हैं, हमें पुनर्वास नहीं, नियुक्ति चाहिए,” एक अभ्यर्थी ने कहा। अब यह निर्णय सिर्फ 417 परिवारों का नहीं, बल्कि राज्य की सुरक्षा, भरोसे और प्रशिक्षित मानव संसाधन के न्यायपूर्ण उपयोग का भी होगा।


