बिहार / स्वतंत्र छत्तीसगढ़ न्यूज़
हाइलाइट
पहले चरण में बिहार की 121 सीटों पर हुई 66 % वोटिंग ने नया इतिहास रचा है । अगर दूसरे और आखिरी चरण में भी इसी तरह मतदान हुआ , तो यह सिर्फ सत्ता नहीं बल्कि राज्य की पूरी राजनीति को नई दिशा दे सकता है ।
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 सीटों पर 66 % की रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई है । यह आंकड़ा न सिर्फ 2020 के मुकाबले काफी ज्यादा है , बल्कि बिहार की सियासत में बड़े बदलाव का संकेत भी दे रहा है । चुनाव आयोग के अनुसार , इस बार महिलाओं और युवाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है ,जिससे मतदान प्रतिशत ने ऐतिहासिक स्तर छू लिया ।
2020 के पहले फेज में मात्र 68 % मतदान हुआ था , लेकिन इस बार 9 % से अधिक की बढ़त ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है । दिलचस्प बात यह है कि तब पहले चरण में केवल 71 सीटों पर चुनाव हुए थे , जबकि इस बार सीटें 121 हैं ।

पटना और गया में मतदान केंद्रों पर उमड़ी भीड़ युवा और महिलाएं सुबह से लाइन में लगीं ।
ऐतिहासिक पैटर्न क्या कहता है ?
आजादी के बाद से हुए 17 विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि जब-जब बिहार में 5 % से अधिक वोटिंग बढ़ी या घटी , तो नतीजों में बड़ा उलटफेर देखने को मिला । 1957 1977 1990 और 2015 जैसे चुनाव इसके गवाह हैं । हर बार बढ़ी हुई वोटिंग ने न सिर्फ सत्ता बदली बल्कि सियासी समीकरण भी पूरी तरह उलट दिए ।
एक्सपर्ट्स की राय सियासत बदलेगी सत्ता शायद नहीं
चार राजनीतिक विशेषज्ञों में से तीन का मानना है कि इस बार सत्ता परिवर्तन की संभावना तो कम है , लेकिन राजनीति की दिशा बदलना तय है । राजनीतिक विश्लेषक डॉ. राजीव पांडेय कहते हैं , “इतनी बड़ी वोटिंग आमतौर पर तब होती है जब जनता किसी मुद्दे को लेकर असाधारण रूप से सक्रिय हो । यह बदलाव की मानसिकता का संकेत है ।” वहीं प्रो. सुनीता मिश्रा का कहना है , “इस बार युवाओं और पहली बार वोट देने वालों की भूमिका अहम रहेगी । 60 % से अधिक मतदान बिहार की नई पीढ़ी के राजनीतिक जागरण का प्रतीक है ।”
महिलाओं की भागीदारी बनी निर्णायक कारक
आंकड़ों के अनुसार , महिलाओं ने इस बार पुरुषों से अधिक संख्या में वोट डाला । ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं । कई स्थानों पर उन्होंने कहा कि वे “परिवर्तन” चाहती हैं — चाहे वह विकास का हो , शिक्षा का या सुरक्षा का ।
राजनीतिक दलों की रणनीति पर असर
राजनीतिक दलों में बढ़े हुए मतदान को लेकर हलचल तेज है । एनडीए और महागठबंधन दोनों अपने-अपने पक्ष में बढ़े मतदान को देख रहे हैं । एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी ने बताया , “इतनी ऊंची वोटिंग हमेशा स्थिर सत्ताओं के लिए चुनौती रही है ।” अब नजरें दूसरे चरण की 122 सीटों पर हैं । अगर वहां भी ऐसा ही ट्रेंड दिखा , तो बिहार की सियासी बयार पूरी तरह बदल सकती है ।
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