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Wednesday, May 13, 2026

क्या बिहार की रिकॉर्ड वोटिंग बदल देगी सियासत का समीकरण ? 66 % मतदान से नई राजनीतिक कहानी की शुरुआत…

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हाइलाइट

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 सीटों पर 66 % की रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई है । यह आंकड़ा न सिर्फ 2020 के मुकाबले काफी ज्यादा है , बल्कि बिहार की सियासत में बड़े बदलाव का संकेत भी दे रहा है । चुनाव आयोग के अनुसार , इस बार महिलाओं और युवाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है ,जिससे मतदान प्रतिशत ने ऐतिहासिक स्तर छू लिया ।

2020 के पहले फेज में मात्र 68 % मतदान हुआ था , लेकिन इस बार 9 % से अधिक की बढ़त ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है । दिलचस्प बात यह है कि तब पहले चरण में केवल 71 सीटों पर चुनाव हुए थे , जबकि इस बार सीटें 121 हैं ।

ऐतिहासिक पैटर्न क्या कहता है ?

आजादी के बाद से हुए 17 विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि जब-जब बिहार में 5 % से अधिक वोटिंग बढ़ी या घटी , तो नतीजों में बड़ा उलटफेर देखने को मिला । 1957 1977 1990 और 2015 जैसे चुनाव इसके गवाह हैं । हर बार बढ़ी हुई वोटिंग ने न सिर्फ सत्ता बदली बल्कि सियासी समीकरण भी पूरी तरह उलट दिए ।

एक्सपर्ट्स की राय सियासत बदलेगी सत्ता शायद नहीं

चार राजनीतिक विशेषज्ञों में से तीन का मानना है कि इस बार सत्ता परिवर्तन की संभावना तो कम है , लेकिन राजनीति की दिशा बदलना तय है । राजनीतिक विश्लेषक डॉ. राजीव पांडेय कहते हैं , “इतनी बड़ी वोटिंग आमतौर पर तब होती है जब जनता किसी मुद्दे को लेकर असाधारण रूप से सक्रिय हो । यह बदलाव की मानसिकता का संकेत है ।” वहीं प्रो. सुनीता मिश्रा का कहना है , “इस बार युवाओं और पहली बार वोट देने वालों की भूमिका अहम रहेगी । 60 % से अधिक मतदान बिहार की नई पीढ़ी के राजनीतिक जागरण का प्रतीक है ।”

महिलाओं की भागीदारी बनी निर्णायक कारक

आंकड़ों के अनुसार , महिलाओं ने इस बार पुरुषों से अधिक संख्या में वोट डाला । ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं । कई स्थानों पर उन्होंने कहा कि वे “परिवर्तन” चाहती हैं — चाहे वह विकास का हो , शिक्षा का या सुरक्षा का ।

राजनीतिक दलों की रणनीति पर असर

राजनीतिक दलों में बढ़े हुए मतदान को लेकर हलचल तेज है । एनडीए और महागठबंधन दोनों अपने-अपने पक्ष में बढ़े मतदान को देख रहे हैं । एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी ने बताया , “इतनी ऊंची वोटिंग हमेशा स्थिर सत्ताओं के लिए चुनौती रही है ।” अब नजरें दूसरे चरण की 122 सीटों पर हैं । अगर वहां भी ऐसा ही ट्रेंड दिखा , तो बिहार की सियासी बयार पूरी तरह बदल सकती है ।

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