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Wednesday, February 11, 2026

“दिवाली से पहले वक्फ बोर्ड का नोटिस: रायपुर की पुरानी बस्ती के हिंदू परिवारों से ज़मीन खाली करने की मांग, सियासत गरमाई – क्या लौटेगी इन घरों की रोशनी?”

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हाइलाइट (Highlights):

  • रायपुर की पुरानी बस्ती में कई हिंदू परिवारों को वक्फ बोर्ड ने जमीन खाली करने का नोटिस दिया
  • नोटिस दीपावली से ठीक एक दिन पहले जारी, 2 दिन में कलेक्टर के सामने जवाब देने का निर्देश
  • BJP नेता संदीप शर्मा ने उठाया सवाल, कहा “त्योहार में क्यों दी लोगों को परेशानी?”
  • वक्फ बोर्ड अध्यक्ष बोले – “बेदखल करना मकसद नहीं, चर्चा से निकलेगा हल”

रायपुर की पुरानी बस्ती में दिवाली से पहले विवाद की चिंगारी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की पुरानी बस्ती में दिवाली से पहले एक विवाद ने सन्नाटा फैला दिया है। यहां दशकों से रह रहे कई हिंदू परिवारों को छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड की ओर से ज़मीन खाली करने का नोटिस थमाया गया है। वक्फ बोर्ड का दावा है कि इन परिवारों के घर जिस ज़मीन पर बने हैं, वह वक्फ की संपत्ति है। इस नोटिस ने त्योहार के माहौल में तनाव और असमंजस पैदा कर दिया है।

दिवाली की रात चिंता का साया – 60 साल पुराने घरों पर नोटिस

इन हिंदू परिवारों का कहना है कि उनके पूर्वज पिछले 60-70 वर्षों से उसी जगह पर रह रहे हैं। दीपावली की पूर्व संध्या पर जब घरों में रोशनी और खुशियों की तैयारी चल रही थी, तभी प्रशासनिक दस्तक ने इन परिवारों के चेहरों से मुस्कान छीन ली। नोटिस में कहा गया है कि दो दिन के भीतर कलेक्टर के सामने पेश होकर जवाब दें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक पारा चढ़ा – BJP नेता ने जताई नाराजगी

इस मामले को BJP नेता और खाद्य आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा ने सार्वजनिक किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि दीपावली जैसे त्योहार पर परिवारों को इस तरह का नोटिस देना अनुचित है। शर्मा ने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर नोटिस जारी किए गए और क्यों पुराने निवासियों को अचानक बेदखली की चेतावनी दी गई। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड को इसपर संवेदनशीलता से विचार करना चाहिए और जरूरत पड़ी तो सरकार से बात की जाएगी।

वक्फ बोर्ड का पक्ष – “किसी को बेदखल करना मकसद नहीं”

वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कहा कि नोटिस मुतवल्ली की सूची के आधार पर जारी किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी को बेदखल करना बोर्ड का उद्देश्य नहीं है। डॉ. राज ने कहा, “हम कब्जाधारियों से चर्चा कर किराया दर तय करेंगे। यदि किसी अधिकारी ने दीपावली के दौरान नोटिस जारी किया है, तो आगे ऐसा न हो इसकी व्यवस्था की जाएगी।”

जनता में चिंता, सियासत में हलचल

पुरानी बस्ती के निवासी अब चिंता और असमंजस में हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से अपने घर बनाए हैं, अब अचानक यह नोटिस त्योहार की खुशियों पर पानी फेर रहा है। दूसरी ओर, इस प्रकरण ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है — जहां BJP नेता अपनी ही सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे ‘डबल इंजन सरकार की नाकामी’ बता रही है।

सवाल बाकी – क्या लौटेगी पुरानी बस्ती की रोशनी?

यह विवाद अब सिर्फ ज़मीन का नहीं रहा, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। दीपावली की रात जो घर रोशनी से जगमग होने थे, अब वहां चिंता का साया मंडरा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या प्रशासन इस विवाद को संवेदनशीलता से सुलझाएगा या पुरानी बस्ती में अंधेरे की यह परछाईं और गहराएगी

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