स्वतंत्र छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में रेत खदानों की लंबे समय से प्रतीक्षित ई-नीलामी प्रक्रिया आज, शुक्रवार 10 अक्टूबर से औपचारिक रूप से शुरू हो रही है। राज्य सरकार ने पहले चरण में 150 रेत घाटों की नीलामी करने का निर्णय लिया है। इसके तहत खनिज विभाग द्वारा जिलेवार एनआईटी (नोटिस इन्वाइटिंग टेंडर) जारी की जाएगी, जिससे इच्छुक बोलीदाता आधिकारिक रूप से प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे।
नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने हाल ही में एमएसटीसी (मेटल स्क्रैप ट्रेडिंग कॉरपोरेशन) के साथ एक समझौता किया है। एमएसटीसी अब संपूर्ण ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया में तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।
ई-नीलामी की शुरुआत से पहले गुरुवार को नवा रायपुर स्थित सत्य साईं हॉस्पिटल के ऑडिटोरियम में एक विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में खनिज विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ संभावित बोलीदाताओं को एमएसटीसी विशेषज्ञों ने नीलामी से संबंधित नियम, शर्तें और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी।
प्रशिक्षण के अंत में बोलीदाताओं की शंकाओं का समाधान भी अधिकारियों द्वारा किया गया।
खनिज विभाग के ओएसडी महेश बाबू ने बताया कि जल्द ही सभी 150 रेत खदानों के लिए निविदा आमंत्रण सूचना सार्वजनिक की जाएगी। जो भी बोलीदाता इस प्रक्रिया में भाग लेना चाहते हैं, उन्हें एमएसटीसी पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा।
15 अक्टूबर तक रेत खनन पर रोक, फिर लौटेगी रौनक
यह गौर करने योग्य है कि एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के नियमों के अनुसार 15 जून से 15 अक्टूबर तक रेत खनन पर राज्य में पूर्ण प्रतिबंध रहता है। इस अवधि के समाप्त होने के बाद ही रेत घाटों के संचालन की अनुमति दी जाती है।
ऐसे में 15 अक्टूबर के बाद नई व्यवस्था के तहत रेत घाटों के पुनः संचालित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जिन 150 रेत घाटों की नीलामी की जा रही है, वे पूरी तरह से नए घाट हैं या पूर्व में नीलाम किए गए पुराने घाटों का ही विस्तार। पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान 110 रेत घाटों की नीलामी हुई थी, जिनकी वैधता अप्रैल तक बताई जा रही है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित
प्रशिक्षण कार्यक्रम में खनिज विभाग की उप-संचालक प्राची अवस्थी, खनिज अधिकारी हेमंत चेरपा, अवधेश बारीक, योगेंद्र सिंह और सहायक खनि अधिकारी उमेश कुमार भार्गव सहित रायपुर संभाग के विभिन्न जिला अधिकारियों की टीम मौजूद रही।
क्या होगा आम जनता पर असर?
रेत खदानों की नीलामी शुरू होते ही निर्माण कार्यों को गति मिलने की संभावना है। लंबे समय से रेत की कमी और ऊंचे दामों से जूझ रहे ठेकेदारों और आम जनता को राहत मिल सकती है। नई ई-नीलामी प्रणाली से सरकारी राजस्व में भी बढ़ोतरी की अपेक्षा है।
रेत खदानों की इस ई-नीलामी प्रक्रिया से जहां सरकार पारदर्शिता और सुव्यवस्थित व्यवस्था लागू करना चाहती है, वहीं बोलीदाताओं और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी नई उम्मीदें जुड़ी हैं। अब सबकी निगाहें 15 अक्टूबर के बाद की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं।
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