रायपुर, 6 अक्टूबर — छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, प्रदेश की राजनीति का प्रमुख केंद्र है। यहां से उठी आवाज़ पूरे राज्य में गूंजती है। बावजूद इसके, आज तक रायपुर कांग्रेस संगठन को कोई महिला शहर अध्यक्ष नहीं मिली है। महिला नेतृत्व की कमी, कांग्रेस की नीतियों के विपरीत मानी जा रही है।कांग्रेस ने 2023 में रायपुर अधिवेशन के दौरान अपने संविधान में संशोधन कर संगठन के सभी पदों के लिए 50% महिलाओं और 50% युवाओं के लिए आरक्षण का वादा किया था।
प्रियंका गांधी द्वारा दिया गया नारा “लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ” महिलाओं के नेतृत्व को आगे लाने की कोशिश है। बावजूद इसके, रायपुर में यह नारा अब तक जमीनी हकीकत नहीं बन सका।राजधानी रायपुर में महिला कांग्रेस कार्यकर्ता बूथ और ब्लॉक स्तर पर लगातार सक्रिय रही हैं। पर, शहर अध्यक्ष पद पुरुषों तक ही सीमित है। इससे न केवल महिलाओं की भागीदारी कम होती है, बल्कि पार्टी की घोषित नीतियों का पालन भी अधूरा रह जाता है।
दूसरी ओर, भाजपा ने महिला मतदाताओं को जोड़ने के लिए ‘महतारी वंदन योजना’ जैसी पहल शुरू की है। कांग्रेस के लिए भी यह वक्त है कि वह महिलाओं को नेतृत्व में वास्तविक भागीदारी दे। यदि रायपुर में कांग्रेस किसी सक्रिय महिला को शहर अध्यक्ष बनाती है, तो इसका प्रभाव पूरे प्रदेश में सकारात्मक संदेश के रूप में जाएगा। इससे महिला कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा और महिला मतदाता कांग्रेस के साथ मज़बूती से जुड़ेंगी।अब जबकि प्रदेश गठन को 25 वर्ष हो गए हैं, रायपुर की कई महिला कार्यकर्ताओं और पार्षदों ने इस बार महिला अध्यक्ष की मांग को तेज़ कर दिया है। उनका कहना है कि संगठन को मजबूत और प्रगतिशील बनाने के लिए एक सक्रिय महिला को शहर अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए।
कहा जा सकता है कि रायपुर में महिला शहर अध्यक्ष की नियुक्ति कांग्रेस की नीतियों के अनुरूप एक ऐतिहासिक कदम होगा, जिससे पार्टी जमीनी स्तर पर और मजबूत बनेगी।
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“जब महिला नेतृत्व आगे बढ़ेगा, तभी कांग्रेस फिर से मज़बूती से उभरेगी।”
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