भारत
अमेरिका से मिल सकती है नई रियायत
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर एक और सकारात्मक संकेत सामने आया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संभावना जताई है कि अमेरिका भारत के टेक्सटाइल उत्पादों पर शून्य प्रतिशत टैरिफ लागू कर सकता है। इससे पहले हालिया ट्रेड समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए जाने वाले टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था। अब यदि टेक्सटाइल पर जीरो टैरिफ लागू होता है तो यह भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी रणनीतिक जीत मानी जाएगी।
कपड़ा निर्यात उद्योग को मिलेगा सीधा लाभ
भारत का टेक्सटाइल उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिका भारत के कुल वस्त्र निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा खरीदता है, इसलिए वहां टैरिफ में कमी या समाप्ति का सीधा असर निर्यात आय और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ेगा। जीरो टैरिफ लागू होने की स्थिति में भारतीय उत्पाद बांग्लादेश और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध हो सकेंगे। इससे विदेशी ऑर्डर बढ़ने और उत्पादन में तेजी आने की संभावना है।
विपक्ष के आरोप और सरकार का जवाब
ट्रेड डील को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि यह समझौता भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि समझौते में भारत और किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेयरी, पोल्ट्री, चावल, गेहूं, सोयाबीन, मक्का, दालें, बाजरा, रागी सहित किसानों के 90-95 प्रतिशत उत्पाद इस डील से बाहर हैं और जिन वस्तुओं का आयात होता भी है, उससे घरेलू किसानों को नुकसान नहीं होगा।
बांग्लादेश मॉडल से तुलना
पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि अमेरिका बांग्लादेश को पहले से टेक्सटाइल निर्यात में शून्य टैरिफ की सुविधा देता है। बांग्लादेश अमेरिकी कच्चा माल खरीदकर तैयार परिधान अमेरिका को निर्यात करता है और उस पर कोई टैरिफ नहीं लगता। यदि भारत को भी ऐसी ही सुविधा मिलती है, तो यह टेक्सटाइल उद्योग के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इससे वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
निर्यातकों की उम्मीदें बढ़ीं
हाल के घटनाक्रम से भारतीय कपड़ा निर्यातकों के बीच आशा की नई लहर दिखाई दे रही है। पहले 18 प्रतिशत टैरिफ के कारण प्रतिस्पर्धा में चुनौती बढ़ने की आशंका थी, लेकिन संभावित जीरो टैरिफ की खबर से उद्योग को राहत की उम्मीद है। यदि अमेरिका औपचारिक रूप से यह निर्णय लेता है, तो यह भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ और निर्यात वृद्धि रणनीति को भी मजबूती प्रदान करेगा।
ख़बरें और भी…


