रायपुर : 30 जुलाई 2025
राजधानी रायपुर में कुख्यात सूदखोर और हिस्ट्रीशीटर तोमर बंधुओं—रोहित सिंह तोमर और वीरेंद्र सिंह तोमर—के खिलाफ जारी प्रशासनिक और पुलिसिया कार्रवाई के बीच बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक अंतरिम राहत प्रदान की है। कोर्ट ने रायपुर नगर निगम को वीरेंद्र तोमर के आवास में तोड़फोड़ से रोकते हुए तेलीबांधा पुलिस को जब्त दस्तावेजों की कॉपी लौटाने के निर्देश दिए हैं, जिससे वह निगम को घर के वैध कागजात प्रस्तुत कर सके। यह आदेश न्यायमूर्ति रविंद्र अग्रवाल की सिंगल बेंच से पारित हुआ, जिसमें तोमर पक्ष की ओर से पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा और वरिष्ठ अधिवक्ता सजल गुप्ता ने पैरवी की।

रायपुर नगर निगम ने 26 जुलाई, रविवार सुबह तोमर बंधुओं के शुभकामना वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तर पर बुलडोजर चलाया, जिसे अवैध निर्माण घोषित किया गया था। यह कार्यालय वीरेंद्र तोमर के घर में संचालित हो रहा था और दस्तावेजों के मुताबिक भावना तोमर (रोहित तोमर की पत्नी) के नाम पर था। इस कार्रवाई पर राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा और डिप्टी सीएम अरुण साव ने कड़ा रुख दिखाते हुए कहा कि “बुलडोजर तो चलेगा,” और किसी भी अपराधी को सत्ता का संरक्षण नहीं मिलेगा। रोहित और वीरेंद्र तोमर दोनों पर 6 से अधिक गंभीर आपराधिक केस दर्ज हैं, जिनमें ब्लैकमेलिंग, सूदखोरी, मारपीट, धमकी और अवैध वसूली शामिल है।
पीड़ितों के अनुसार वे ब्याज पर कर्ज देकर कई गुना वसूली करते थे। एक मामला सामने आया जिसमें 10 लाख का कर्ज लेकर व्यक्ति से 1.10 करोड़ रुपए वसूले गए। इन आरोपियों ने कई संपत्तियाँ, गाड़ियाँ और दस्तावेज अवैध रूप से कब्जे में रखे थे।रोहित सिंह तोमर की पत्नी भावना तोमर, जो कि शुभकामना वेंचर्स प्रा. लिमिटेड की डायरेक्टर थीं, को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। भावना पर आरोप है कि उन्होंने 3 लाख की उधारी के बदले एक जगुआर कार (कीमत लगभग 15 लाख) गिरवी रखी और बाद में 5 लाख वसूलने के बाद भी 10 लाख की मांग करती रहीं।
पुलिस ने भावना से दो मोबाइल, दस्तावेज और कार बरामद की। उसे इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वह फरार रोहित तोमर के संपर्क में थी। निगरानी गुंडा और सोने का शौकीन “गोल्डन मैन”रोहित तोमर को रायपुर पुलिस ने निगरानी बदमाश घोषित किया है। वह “गोल्डन मैन” के नाम से भी जाना जाता था और लगातार रसूख दिखाने के लिए बड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेता था। उसके खिलाफ राजेंद्र नगर, कोतवाली, तेलीबांधा, गुढ़ियारी और पुरानी बस्ती थानों में नौ से ज्यादा केस दर्ज हैं। 18 जुलाई को कोर्ट में हाजिर न होने पर कोर्ट ने रोहित और वीरेंद्र तोमर को फरार घोषित कर उद्घोषणा जारी की| इसका मतलब है कि अब अगर आरोपी निश्चित तारीख तक हाजिर नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और कुर्की जैसी कार्रवाई संभव है।
प्रशासनिक और पुलिसिया कार्रवाई के बाद अब कई पीड़ित सामने आ रहे हैं। रायपुर के अलावा नारायणपुर जिले के पीड़ित ने भी पुरानी बस्ती थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसका संकेत है कि तोमर बंधुओं का लंबा और फैला हुआ कर्ज-उगाही रैकेट रहा है, जिसमें दबाव, डर और दबंगई का इस्तेमाल होता था। पुलिस ने फरार भाइयों की गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित कर रखा है। कई राज्यों में टीमें भेजी गई हैं, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है।
हाईकोर्ट से मिली राहत तोमर परिवार के लिए कुछ समय की मोहलत है, लेकिन फरारी, उद्घोषणा, और लगातार सामने आ रहे पीड़ितों की गवाही इस बात का संकेत है कि अब मामला केवल एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक तंत्र के खिलाफ सरकार और कानून का अभियान बन चुका है। सरकार का रुख स्पष्ट है—कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं।
अब देखना यह है कि तोमर बंधुओं की गिरफ्तारी कब होती है और न्याय की दिशा में यह मामला किस मोड़ पर जाता है।
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