दंतेवाड़ा : 30 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। बिना किसी विभागीय जांच (डीआई) के 1408 दिन तक अनुपस्थित रहे डॉ. देवेंद्र प्रताप को गीदम ब्लॉक का ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) नियुक्त कर दिया गया है।
नियमानुसार, यदि कोई शासकीय सेवक तीन साल से अधिक समय तक बिना सूचना के अनुपस्थित रहता है, तो उसे सेवा से स्वतः त्यागपत्र दिया मान लिया जाता है। इसके अतिरिक्त, एक माह से अधिक अनुपस्थिति पर भी विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है। बावजूद इसके, डॉक्टर को न सिर्फ सेवा में बहाल किया गया, बल्कि जिम्मेदार पद भी सौंपा गया।
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डॉ. प्रताप 21 अगस्त 2021 से 46 माह तक लगातार अनुपस्थित रहे। इस दौरान उन्हें केवल पाँच बार नोटिस जारी किए गए, जिनका कोई उत्तर नहीं दिया गया। जानकारी के अनुसार, इस अवधि में उन्होंने जगदलपुर में अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक निजी अस्पताल भी संचालित किया, जिसका पंजीयन विवादों में रहा। दंतेवाड़ा CMHO डॉ. अजय रामटेके ने इस नियुक्ति पर “ऊपर से आदेश” का हवाला दिया है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के जेडी डॉ. महेश शांडिया ने नियमों की जानकारी न होने की बात कही।
इस मामले में शासन की नियमावली की अनदेखी, विभागीय जांच की अनुपस्थिति और राजनीतिक दबाव की आशंका जैसे गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
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