इंदौर : 18 जुलाई 2025
इंदौर हाई कोर्ट ने गंभीर चोटों के मामलों में पुलिस द्वारा जानबूझकर हल्की धाराएं लगाने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराज़गी जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह मध्यप्रदेश में एक दोहराया जाने वाला (Recurring) पैटर्न बन चुका है, जहां गंभीर मारपीट के मामलों में भी पुलिस आरोपियों को लाभ पहुंचाने के लिए कमजोर धाराएं लगाती है।
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की खंडपीठ ने डीजीपी को निर्देश दिए कि मारपीट या घायल करने के हर मामले में थाने स्तर पर पीड़ितों की तस्वीरें खींची जाएं। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि केस में लगी धाराएं चोटों की गंभीरता के अनुसार हैं या नहीं। कोर्ट ने कहा कि पुलिस और डॉक्टर दोनों को यह प्रक्रिया पूरी ईमानदारी से अपनानी होगी ताकि साक्ष्य मजबूत हों और न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्टता बनी रहे।
यह भी पढ़े : कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में चीतल का शिकार, तीर लगने से मौत – जानकारी देने वाले को ₹10,000 इनाम…
यह टिप्पणी कोर्ट ने शीतू नामक आरोपी से जुड़े एक मामले में की। शिकायतकर्ता को गंभीर चोटें आई थीं, लेकिन पुलिस ने उसे मामूली कहकर हल्की धाराएं लगाईं। पुलिस ने सफाई दी कि घटना रात में हुई, इसलिए फोटो नहीं लिए जा सके।
कोर्ट ने पुलिस की रिपोर्ट को विरोधाभासी पाया। एक ओर पुलिस ने मामूली धाराएं लगाईं, वहीं दूसरी ओर स्वीकार किया कि शिकायतकर्ता को गंभीर चोटें थीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में शुरूआती जांच और धाराएं आरोपियों को ज़मानत का अनुचित लाभ दिलाने के उद्देश्य से कमजोर की जाती हैं, जिसे अदालत नजरअंदाज नहीं कर सकती।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते इन खामियों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इससे न्याय प्रक्रिया पर आम जनता का विश्वास कमजोर होगा। अदालत ने डीजीपी को पूरे प्रदेश में इस दिशा में ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
व्हाट्सअप ग्रुप से जुड़ने के लिए लिंक:https://chat.whatsapp.com/BbNFAy9gDg1E4s1kHkjJrG


