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शहीद एएसपी आकाश राव गिरीपुंजे: नक्सलवाद के खिलाफ जंग में एक और वीर सपूत का बलिदान…

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रायपुर : 10 जून 2025

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में एएसपी आकाश राव गिरीपुंजे शहीद हो गए। यह घटना नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान सुरक्षाबलों के लिए एक गहरी क्षति है। एएसपी गिरीपुंजे का बलिदान राज्य के लिए अपूरणीय है, जिसने न केवल एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी को खोया, बल्कि एक परिवार से उसका सहारा भी छीन लिया।

शहीद की जीवनी: समर्पण और साहस की मिसाल

आकाश राव गिरीपुंजे रायपुर के निवासी थे। उनका जन्म 7 फरवरी 1983 को हुआ था और वह 2013 बैच के राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी थे। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद पुलिस अकादमी चंदखुरी से प्रशिक्षण प्राप्त किया और अपनी सेवा के दौरान कांकेर, राजनांदगांव, मानपुर, मोहला, दुर्ग, महासमुंद, और सुकमा जैसे संवेदनशील इलाकों में अपनी ड्यूटी निभाई। वर्तमान में वे सुकमा के कोंटा क्षेत्र में तैनात थे, जहां उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।

शहीद का पार्थिव शरीर रायपुर पहुंचते ही माहौल गमगीन

सोमवार शाम जब शहीद का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर रायपुर स्थित उनके आवास पहुंचा, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का विलाप हर किसी की आंखों को नम कर गया। पत्नी बार-बार तिरंगे से लिपटे पति को पकड़कर रोती रहीं। दो छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। यह दृश्य न केवल हृदय विदारक था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि देश के लिए बलिदान देने वाले परिवार किस पीड़ा से गुजरते हैं।

मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, जताया गर्व

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शहीद एएसपी को श्रद्धांजलि देने उनके निवास पहुंचे। उन्होंने पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर नमन किया और परिजनों से मिलकर सांत्वना दी। मुख्यमंत्री साय ने कहा:

“शहीद आकाश राव गिरीपुंजे ने कर्तव्य के प्रति अदम्य साहस, निष्ठा और समर्पण दिखाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। हमें उन पर गर्व है। राज्य सरकार इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।”

उन्होंने आगे यह भी कहा कि नक्सलवाद अब अंतिम सांसें गिन रहा है और सरकार का नक्सल उन्मूलन अभियान निर्णायक मोड़ पर है।

शहीद की बहुआयामी शख्सियत

आकाश राव गिरीपुंजे न केवल एक तेजतर्रार अधिकारी थे, बल्कि एक संवेदनशील और जीवन से भरपूर इंसान भी थे। उन्हें गीत-संगीत का बेहद शौक था और वे शादी समारोहों में अक्सर गाया करते थे। उनके साथी पुलिसकर्मी बताते हैं कि वे अपनी जीवंतता और जिंदादिली से हर माहौल को खुशनुमा बना देते थे।

समाज का कर्तव्य: बलिदान को स्मरण और सम्मान

शहीद आकाश राव गिरीपुंजे जैसे अधिकारी राष्ट्र की सुरक्षा की वह दीवार हैं, जिनके बल पर देश आज निडर होकर सांस ले सकता है। उनके बलिदान को शब्दों में समेटना संभव नहीं, लेकिन उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करना हमारा कर्तव्य है। सरकार को चाहिए कि ऐसे शहीदों के परिवारों को दीर्घकालिक सहायता, बच्चों की शिक्षा और पुनर्वास के उपाय सुनिश्चित करे।

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