पत्रकार मुकेश चन्द्रकार हत्याकांड: सच्चाई उजागर करने की कीमत बनी मौत…

रायपुर : 19 मार्च 2025 (स्वतंत्र छत्तीसगढ़)

पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन जब यही स्तंभ सच्चाई उजागर करने की कीमत चुकाने लगे, तो यह समाज के लिए चिंता का विषय बन जाता है। हाल ही में हुए पत्रकार मुकेश चन्द्रकार हत्याकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पत्रकार सुरक्षित हैं? क्या घोटालों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को संरक्षण मिल पा रहा है?

पत्रकार मुकेश चन्द्रकार एक ईमानदार और निडर पत्रकार थे, जो नेलसनार-मिरतूर-गंगालूर सड़क निर्माण में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे थे। उनकी खोजी पत्रकारिता से ठेकेदार सुरेश चन्द्रकार समेत अन्य लोगों के काले कारनामे सामने आने लगे थे। यह सच्चाई ठेकेदार और उसके सहयोगियों को नागवार गुजरी, जिससे उन्होंने पत्रकार की हत्या की साजिश रची।

हत्या के बाद अपराधियों ने शव को सेप्टिक टैंक में डालकर ऊपर से फ्लोरिंग करवा दी ताकि कोई सुराग न मिले। लेकिन विशेष जांच टीम (SIT) ने तत्परता दिखाते हुए मामले की गहराई से जांच की और फॉरेंसिक तकनीकों के माध्यम से सच्चाई उजागर कर दी। SIT ने 72 गवाहों के बयानों और डिजिटल सबूतों के आधार पर 1241 पन्नों की चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की। DNA टेस्ट और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों ने आरोपियों की संलिप्तता सिद्ध कर दी। इस जघन्य हत्याकांड में चार आरोपी गिरफ्तार किए गए | जिनमे सुरेश चन्द्रकार (मुख्य आरोपी, ठेकेदार), दिनेश चन्द्रकार,रितेश चन्द्रकार, महेन्द्र रामटेके हैं |

पत्रकारों की सुरक्षा पर उठते सवाल:

यह मामला पत्रकारों की सुरक्षा के प्रति गंभीर चिंता पैदा करता है। जब भी कोई पत्रकार भ्रष्टाचार या सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे धमकियां और जानलेवा हमलों का सामना करना पड़ता है। क्या हमारी व्यवस्था पत्रकारों को सुरक्षा देने में सक्षम है? सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि भविष्य में कोई और मुकेश चन्द्रकार सच्चाई उजागर करने की सजा न भुगते।

यह हत्याकांड केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। यदि दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिली, तो यह अपराधियों के हौसले और बढ़ाएगा। यह समय है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस कानून बनाए जाएं और उन्हें संरक्षित किया जाए ताकि सच्चाई को उजागर करने की परंपरा जीवित रहे।

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