कपूरथला /पंजाब /भारत
हाइलाइट
- पहली बार आरसीएफ कपूरथला में वंदे भारत ट्रेन का निर्माण
- 16 कोचों वाली आधुनिक ट्रेन संचालन के लिए तैयार
- 160 किमी/घंटा की गति, अत्याधुनिक सुरक्षा व सुविधाएं
- ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रेल निर्माण को मिली मजबूती
स्वदेशी निर्माण को नई दिशा
कपूरथला : देश में स्वदेशी रेल निर्माण को नई गति देते हुए रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला ने अपनी पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का सफल निर्माण कर लिया है। 16 कोचों वाली यह अत्याधुनिक ट्रेन अंतिम चरण में है और इसी माह के अंत तक इसे संचालन के लिए सौंपे जाने की तैयारी है। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के आत्मनिर्भर भारत मिशन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

मीडिया दौरे में सामने आई निर्माण प्रक्रिया
पत्र सूचना कार्यालय द्वारा आयोजित मीडिया दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ से आए 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने फैक्ट्री का निरीक्षण किया। पत्रकारों ने कच्चे स्टील से आधुनिक कोच बनने की पूरी प्रक्रिया को करीब से देखा। इस अवसर पर उप महाप्रबंधक अमन कुमार ने बताया कि वंदे भारत कोचों का यह नया संस्करण तकनीकी रूप से पहले से अधिक उन्नत और सुरक्षित है।
निर्माण क्षमता में बड़ा विस्तार
उन्होंने बताया कि इससे पहले वंदे भारत ट्रेन का डिजाइन और निर्माण इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई में किया जाता था, लेकिन अब इसे कपूरथला और मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली जैसे कारखानों में भी विकसित किया जा रहा है। इससे भारतीय रेलवे की उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। आरसीएफ हर साल करीब 2,200 से 2,300 कोचों का निर्माण करता है।
सुरक्षा और सुविधाओं में अत्याधुनिक बदलाव
नई वंदे भारत ट्रेन में ‘कवच’ (Train Collision Avoidance System), क्रैशवर्दी डिजाइन और उन्नत अग्नि सुरक्षा प्रणाली जैसे फीचर्स शामिल किए गए हैं। ट्रेन 160 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति से चल सकती है (डिजाइन गति 180 किमी/घंटा)। इसके अलावा यात्रियों को बेहतर एसी सिस्टम, आरामदायक सीटिंग, मोबाइल चार्जिंग, सीसीटीवी निगरानी, जीपीएस सूचना प्रणाली और स्वचालित दरवाजों जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम
वर्ष 1988 में स्थापित यह फैक्ट्री आज एक विकसित टाउनशिप के रूप में भी उभरी है, जहां हजारों कर्मचारी कार्यरत हैं और सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उल्लेखनीय है कि वंदे भारत ट्रेन, जिसे पहले ‘ट्रेन 18’ के नाम से जाना जाता था, ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विकसित की गई थी और 2019 में शुरू हुई थी। अब कपूरथला में इसका निर्माण शुरू होना देश को आधुनिक रेल तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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