नईदिल्ली
हाइलाइट बॉक्स:
- फेज-V (बी) में 7 नए मेट्रो कॉरिडोर की घोषणा
- कुल लंबाई 97.158 किमी, 65 नए स्टेशन प्रस्तावित
- अनुमानित लागत ₹48,204.56 करोड़
- चार कॉरिडोर 2029 तक पूरे करने का लक्ष्य
- दूरदराज इलाकों को मिलेगा पहली बार मजबूत कनेक्शन
दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए Delhi Metro Rail Corporation के 32वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने मेट्रो फेज-V (बी) के तहत 7 नए कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत करीब 97.158 किलोमीटर लंबा नेटवर्क और 65 नए स्टेशन बनाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे दिल्ली-एनसीआर के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।

ढांसा-नांगलोई और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट-किशनगढ़ कॉरिडोर की खासियत
पहले कॉरिडोर में ढांसा बस स्टैंड से नांगलोई तक 11.859 किमी लंबा एलिवेटेड रूट बनाया जाएगा, जिसमें 9 स्टेशन होंगे और यह कई उभरते इलाकों को जोड़ेगा। वहीं दूसरा कॉरिडोर केंद्रीय सचिवालय से किशनगढ़ तक 15.969 किमी लंबा होगा, जिसमें अधिकांश हिस्सा अंडरग्राउंड रहेगा। यह रूट आर.के. पुरम, जेएनयू और प्रधानमंत्री संग्रहालय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ते हुए मल्टी-लाइन इंटरचेंज की सुविधा देगा।
उत्तर और पश्चिमी दिल्ली को मिलेगा नया विस्तार
तीसरा कॉरिडोर समयपुर बादली से नरेला तक येलो लाइन का विस्तार होगा, जिससे उत्तरी दिल्ली के कई क्षेत्रों को सीधी मेट्रो सुविधा मिलेगी। चौथा कॉरिडोर कीर्ति नगर से पालम तक बनाया जाएगा, जिसमें अंडरग्राउंड और एलिवेटेड दोनों सेक्शन शामिल होंगे। यह पश्चिमी दिल्ली के औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों को जोड़कर यात्रा को अधिक सुगम बनाएगा।
दक्षिण और पूर्वी दिल्ली में मजबूत कनेक्टिविटी
पांचवां कॉरिडोर जोर बाग से मिठापुर तक विकसित किया जाएगा, जो दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के कई अहम क्षेत्रों को जोड़ेगा और मल्टी-इंटरचेंज सुविधा प्रदान करेगा। वहीं छठा कॉरिडोर शास्त्री पार्क से मयूर विहार फेज-III तक होगा, जिससे पूर्वी दिल्ली और आसपास के इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, खासकर दैनिक यात्रियों को बड़ा लाभ होगा।
रोहिणी तक नया कॉरिडोर और भविष्य की योजना
सातवां कॉरिडोर केशवपुरम से रोहिणी सेक्टर-34 तक पूरी तरह एलिवेटेड होगा, जो उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के विकास को गति देगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, सात में से चार कॉरिडोर को प्राथमिकता देते हुए 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि बाकी परियोजनाएं चरणबद्ध तरीके से पूरी होंगी। इस विस्तार के बाद राजधानी में मेट्रो की पहुंच और व्यापक होगी, जिससे ट्रैफिक दबाव कम होगा और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
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