दिल्ली /भारत
हाइलाइट :
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो खुद को भारतीय सेना और वायु सेना के अधिकारी बताकर व्यापारियों और सप्लायर्स को निशाना बना रहा था। गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में 5 लाख रुपये से अधिक की ठगी सामने आई है।
दिल्ली पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी पहचान और नकली सैन्य दस्तावेजों के जरिए लोगों को ठग रहे थे। आरोपियों ने खुद को भारतीय वायु सेना का अधिकारी बताकर औद्योगिक उपयोग में आने वाले एल्युमिनस लैटेराइट की खरीद का झांसा दिया और पीड़ित से लाखों रुपये की ठगी कर ली। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने भरोसा जीतने के लिए भारतीय वायु सेना का फर्जी परचेज ऑर्डर भी तैयार किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार इस धोखाधड़ी में उसे कुल 5,06,415 रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।
फर्जी दस्तावेजों से जीतते थे भरोसा
जांच में पता चला कि गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोपी व्यापारियों को बड़े ऑर्डर का लालच देकर पहले सामान मंगवाते थे, फिर “वेंडर रजिस्ट्रेशन”, “अकाउंट मैपिंग” और “स्वीकृत वेंडर सूची” में नाम जोड़ने जैसे बहाने बनाकर अतिरिक्त रकम मांगते थे। पुलिस के मुताबिक गिरोह ने करीब 30 सिम कार्ड खरीदे थे, जिन्हें लगभग 1,500 रुपये प्रति सिम के हिसाब से हासिल किया गया था। साथ ही छह बैंक खातों की भी व्यवस्था की गई थी, जिनका उपयोग ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। पूछताछ में आरोपियों ने माना कि वे अलग-अलग लोगों के नाम पर सिम कार्ड और बैंक खाते लेकर अपनी पहचान छिपाते थे।
तकनीकी जांच से खुला नेटवर्क
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली क्राइम ब्रांच ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। तकनीकी निगरानी और खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस उस सिम कार्ड तक पहुंची, जिससे पीड़ित से संपर्क किया गया था। जांच में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी मनीष और अलीगढ़ निवासी कौशल की पहचान हुई, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में हरियाणा के नूंह (मेवात) क्षेत्र से बुरहान उर्फ आमिर और रिजवान अहमद को भी पकड़ा गया। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह अंतर-राज्यीय स्तर पर सक्रिय था और अभी भी इसके अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
मेवात क्षेत्र से जुड़ा साइबर फ्रॉड नेटवर्क
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि नूंह (मेवात) क्षेत्र के कई दूरदराज इलाकों में इस तरह के साइबर अपराधों का नेटवर्क सक्रिय है। यहां के कई युवा फर्जी सैन्य अधिकारी बनकर व्यापारियों और सप्लायर्स को निशाना बनाते हैं। आरोपी ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में घुमाकर पुलिस ट्रैकिंग से बचने की कोशिश करते थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेयर और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों ने व्यापारियों और सप्लायर्स से अपील की है कि किसी भी सरकारी या सैन्य ऑर्डर की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि किए बिना लेन-देन न करें।
पुलिस की अपील और साइबर सुरक्षा चेतावनी
पुलिस अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा है कि किसी भी बड़े ऑर्डर, सरकारी खरीद या सैन्य सौदे से पहले संबंधित विभाग से दस्तावेजों की पुष्टि जरूर करें। केवल व्हाट्सएप, फोन कॉल या ईमेल के आधार पर किसी भी व्यक्ति की पहचान पर भरोसा न करें। साइबर अपराधी अब फर्जी सरकारी पहचान पत्र, जाली लेटरहेड और नकली क्रय आदेशों का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए व्यापारियों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
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