पंजाब / भारत
मुख्य बिंदु (Highlight):
- 2002 के पत्रकार राम चंदर छत्रपति हत्या मामले में बड़ा फैसला
- पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा प्रमुख राम रहीम को किया बरी
- 2019 में CBI कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा
- अन्य मामलों के चलते फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे
24 साल पुराने मामले में हाई कोर्ट का फैसला
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख Gurmeet Ram Rahim Singh को 24 साल पुराने पत्रकार हत्या मामले में बड़ी राहत मिली है। शनिवार को Punjab and Haryana High Court ने सुनवाई करते हुए उन्हें बरी कर दिया। इससे पहले साल 2019 में Central Bureau of Investigation की विशेष अदालत ने राम रहीम समेत तीन अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
2002 में पत्रकार की हत्या से मचा था हड़कंप
यह मामला वर्ष 2002 का है, जब हरियाणा के सिरसा में स्थानीय अखबार चलाने वाले पत्रकार राम चंदर छत्रपति ने अपने समाचार पत्र में डेरा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ कई रिपोर्ट प्रकाशित की थीं। इन रिपोर्टों में डेरा के अंदर यौन शोषण से जुड़े गंभीर आरोपों का जिक्र किया गया था। इसके बाद इस मामले की जांच शुरू हुई। इसी दौरान अक्टूबर 2002 में अज्ञात हमलावरों ने राम चंदर को उनके घर के बाहर गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी और मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया।
2019 में CBI कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद
पत्रकार की हत्या के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। लंबी जांच और सुनवाई के बाद 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरमीत राम रहीम सिंह के साथ कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने माना था कि पत्रकार की हत्या साजिश के तहत कराई गई थी।
हाई कोर्ट से बरी, लेकिन जेल से रिहाई नहीं
अब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में राम रहीम को बरी कर दिया है। हालांकि इस फैसले के बावजूद वह तुरंत जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। दरअसल, उनके खिलाफ अन्य आपराधिक मामलों में सजा और मुकदमे चल रहे हैं, जिसके कारण उन्हें फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
फैसले के बाद फिर चर्चा में आया मामला
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। पत्रकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों के बीच इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। वहीं, कानूनी प्रक्रिया के अगले चरणों पर भी सभी की नजर बनी हुई है।
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