राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली को लेकर छत्तीसगढ़ शासन ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। 23 जनवरी 2026 से प्रभावी होने वाले इस सिस्टम के तहत 21 शहरी थाने सीधे पुलिस आयुक्त के अधीन होंगे। बढ़ती आबादी, अपराध और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए सरकार ने इसे शहरी प्रशासन के लिए एक बड़ा सुधार बताया है।
राजधानी में नया पुलिस ढांचा, त्वरित निर्णयों पर जोर
रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन के गृह (पुलिस) विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार रायपुर नगर निगम क्षेत्र को औपचारिक रूप से पुलिस कमिश्नरेट घोषित किया गया है। लगभग 19 लाख की आबादी वाली राजधानी में शहरीकरण के साथ अपराध, यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही थीं। सरकार का मानना है कि कमिश्नरी सिस्टम से निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और कानून-व्यवस्था पर सीधा, प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। अब तक कई अहम फैसलों के लिए कलेक्टर और मजिस्ट्रेटी प्रक्रिया पर निर्भरता रहती थी, जो इस नए ढांचे में काफी हद तक पुलिस प्रशासन के स्तर पर ही संभव हो सकेगी।
21 शहरी थाने शामिल, ग्रामीण जिला अलग
अधिसूचना के अनुसार रायपुर नगर पुलिस जिले के अंतर्गत आने वाले 21 थाना क्षेत्रों—जैसे सिविल लाइन, कोतवाली, तेलीबांधा, गोल बाजार, पंडरी, खम्हारडीह, टिकरापारा, डी.डी. नगर और उरला (नगर निगम क्षेत्र)—को कमिश्नरेट सीमा में शामिल किया गया है। इन सभी थानों की कानून-व्यवस्था अब सीधे पुलिस आयुक्त के नियंत्रण में रहेगी। वहीं रायपुर ग्रामीण पुलिस जिला इस व्यवस्था से अलग रहेगा, जिसके अंतर्गत विधानसभा, धरसींवा, खरोरा, तिल्दा-नेवरा, माना, आरंग, अभनपुर सहित 12 थाने यथावत पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के अधीन काम करेंगे। रायपुर (ग्रामीण) रेंज में गरियाबंद, बलौदाबाजार, धमतरी और महासमुंद जैसे जिले शामिल रहेंगे।
37 वरिष्ठ पद, मजिस्ट्रेटी अधिकार और व्यापक शक्तियाँ
कमिश्नरेट व्यवस्था के लिए कुल 37 वरिष्ठ पद सृजित किए गए हैं, जिनमें 1 पुलिस आयुक्त, 1 अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, 5 पुलिस उपायुक्त, 9 अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त और 21 सहायक पुलिस आयुक्त शामिल हैं। इन अधिकारियों को जोन, अपराध शाखा, यातायात, साइबर सेल, महिला अपराध, इंटेलिजेंस और कानून-व्यवस्था जैसी इकाइयों की जिम्मेदारी दी जाएगी। खास बात यह है कि पुलिस आयुक्त को धारा 144 लागू करने, जुलूस व धरना-प्रदर्शन की अनुमति या प्रतिबंध, निषेधाज्ञा जारी करने और आपात स्थितियों में त्वरित आदेश देने जैसे मजिस्ट्रेटी अधिकार भी सौंपे गए हैं। ये शक्तियाँ छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम 2007, मोटर वाहन अधिनियम 1988, विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1967 सहित कई केंद्रीय व राज्य कानूनों के तहत दी जाएंगी। सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था राजधानी में अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाएगी।
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