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Friday, February 13, 2026

मेकाहारा रायपुर में दुर्लभ सर्जरी सफल: ब्रश करते समय फटी गर्दन की नस, डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी…

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रायपुर/ छत्तीसगढ़

स्पॉन्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर का छत्तीसगढ़ में पहला सफल उपचार, विश्व में अब तक केवल 10 केस दर्ज

पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक और बड़ी चिकित्सा उपलब्धि दर्ज की है। यहां डॉक्टरों ने गर्दन की मुख्य धमनी कैरोटिड आर्टरी के स्वतः फटने जैसे अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा केस में समय रहते सफल सर्जरी कर 40 वर्षीय मरीज की जान बचा ली। चिकित्सा जगत के अनुसार यह स्थिति बेहद कम देखने को मिलती है और अब तक विश्व के मेडिकल जर्नल्स में केवल 10 ही ऐसे केस दर्ज हैं। छत्तीसगढ़ में यह पहला सफल ऑपरेशन माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार रायपुर निवासी 40 वर्षीय मरीज सुबह घर पर दांत साफ कर रहा था, तभी अचानक उसके गले में तेज दर्द हुआ और कुछ ही समय में गर्दन सूज गई। मरीज बेहोश हो गया, जिसके बाद परिजन उसे तत्काल मेकाहारा के आपातकालीन वार्ड लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने सीटी एंजियोग्राफी जांच कर पाया कि मरीज की दायीं कैरोटिड आर्टरी फट चुकी है और उसके आसपास स्यूडोएन्युरिज्म बन गया है। स्थिति बेहद गंभीर थी और किसी भी विलंब से मरीज की जान जा सकती थी।

डॉ. कृष्ण कांत साहू के नेतृत्व में वैस्कुलर सर्जरी टीम ने जोखिमपूर्ण सर्जरी का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान गर्दन में खून जमने के कारण धमनी की पहचान करना चुनौतीपूर्ण रहा। मामूली सी गलती से मरीज को लकवा या ब्रेन डेड होने का खतरा था। कई घंटे चले इस जटिल ऑपरेशन में बोवाइन पेरिकार्डियम पैच की सहायता से फटी धमनी की सावधानीपूर्वक मरम्मत की गई। राहत की बात यह रही कि सर्जरी पूरी तरह सफल रही और मरीज को किसी भी प्रकार का लकवा नहीं हुआ। वर्तमान में वह पूरी तरह स्वस्थ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्यतः कैरोटिड आर्टरी का फटना एथेरोस्क्लेरोसिस, ट्रॉमा, संक्रमण, कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर या ट्यूमर के मामलों में देखा जाता है, लेकिन इस मरीज को ऐसी कोई बीमारी नहीं थी। इस वजह से इसे स्पॉन्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर (SCAR) माना गया है, जो बेहद दुर्लभ है।
कैरोटिड आर्टरी गर्दन के दोनों ओर स्थित वह प्रमुख धमनी है जो हृदय से मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाती है। इसके क्षतिग्रस्त होने पर मरीज की जान को तत्काल खतरा हो सकता है, इसलिए समय पर उपचार बहुत जरूरी होता है।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस सफल सर्जरी पर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. संतोष सोनकर और पूरी वैस्कुलर सर्जरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने इसे प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।

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