30.1 C
Raipur
Wednesday, February 11, 2026

भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन पर फिर लापरवाही का केस: डेढ़ महीने बाद दर्ज 5वीं FIR…

HomeChhattisgarhभिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन पर फिर लापरवाही का केस: डेढ़ महीने बाद...

Date:

भिलाई/छत्तीसगढ़

दुर्ग जिले के भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के एसएमएस-02 क्षेत्र में 15 नवंबर 2025 को हुए भीषण औद्योगिक हादसे में 42 वर्षीय मजदूर देवेन्द्र चंद्राकर की मौत के मामले में अब करीब डेढ़ महीने बाद भिलाई भट्टी थाना पुलिस ने BSP प्रबंधन पर अपराध दर्ज कर लिया है। 3 जनवरी 2026 को पंजीबद्ध इस FIR में प्रबंधन पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और कार्यस्थल पर उपेक्षापूर्ण लापरवाही बरतने का आरोप तय किया गया है। पुलिस के मुताबिक, निर्माणाधीन ईसीआर भवन में कार्य के दौरान विंच मशीन का विंचिंग हिस्सा अचानक टूटकर गिर गया, जिससे मजदूर नीचे गिरकर मशीन की चपेट में आ गया। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आने के बाद उसे तत्काल BSP के मेन मेडिकल पोस्ट-1 (मेन मेडिकल पोस्ट-1, अस्पताल-01) ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद ‘ब्रॉट डेड’ घोषित कर दिया। घटना की सूचना रात 8 बजे भिलाई भट्टी थाना में दी गई थी, जिसके बाद मर्ग क्रमांक 39/2025, धारा 194 BNSS के तहत मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई। मर्ग जांच के दौरान पुलिस को मिले साक्ष्यों और बयान के आधार पर BSP प्रबंधन की लापरवाही स्पष्ट रूप से उजागर हुई, जिसके बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) एवं 289 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। संयंत्र प्रबंधन पर दर्ज इस FIR को मिलाकर पिछले 3 महीनों में यह 5वां आपराधिक मामला है, जो औद्योगिक सुरक्षा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पिछले 3 महीनों में 5वीं FIR: बढ़ते हादसे और जवाबदेही पर उठते सवाल
FIR का यह नया मामला भिलाई इस्पात संयंत्र में औद्योगिक सुरक्षा के गिरते मानकों और बढ़ते जोखिमों की कड़ी का हिस्सा बनकर सामने आया है। इससे पहले BSP प्रबंधन के खिलाफ नवंबर 2025 में 2, दिसंबर 2025 में 2, और जनवरी 2025 में एक अलग मामले में क्रेन ऑपरेटर के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई थी। हालांकि जनवरी 2025 की FIR क्रेन ऑपरेटर पर केंद्रित थी, लेकिन बाकी चारों मामलों में संयंत्र प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगा था। ताजा FIR में भी पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि BSP प्रबंधन द्वारा आवश्यक सुरक्षा मानकों, मशीन निरीक्षण, उपकरणों के रखरखाव और मजदूरों के लिए जरूरी सुरक्षा उपायों की अनदेखी की गई। विंच मशीन जैसे भारी औद्योगिक उपकरण का कार्यस्थल पर बिना पूर्व संरचनात्मक जांच और सुरक्षा प्रोटोकॉल के उपयोग कराना सीधे तौर पर ‘मानवीय जीवन के प्रति उपेक्षा’ की श्रेणी में आता है। जांच अधिकारियों के अनुसार, निर्माण स्थल पर कार्यरत मजदूरों को न तो पर्याप्त हेलमेट सुरक्षा, न ही फॉल-अरेस्ट सिस्टम, और न ही मशीनों के संचालन से पहले संरचनात्मक स्थिरता परीक्षण का प्रमाण मिला। सुरक्षा प्रबंधन में चूक का यह पैटर्न BSP की कार्यप्रणाली में प्रणालीगत लापरवाही की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही प्रबंधन पर इतने कम समय में बार-बार FIR दर्ज होना यह दर्शाता है कि यह महज संयोग नहीं, बल्कि सुरक्षा तंत्र में गंभीर संस्थागत खामी है, जिसकी विस्तृत ऑडिट और स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
परिजनों का दर्द, प्रशासन की सक्रियता और कानूनी धाराओं का कठोर संदेश
मृतक देवेन्द्र चंद्राकर भिलाई के शंकर पारा, भिलाई शंकर पारा के निवासी थे और अपने परिवार के लिए एकमात्र कमाऊ सदस्य बताए गए। हादसे के बाद से उनके परिजन लगातार BSP प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग कर रहे थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच प्रतिवेदन SDM भिलाई नगर को भी भेजा है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और वैधानिक प्रक्रियाएं तेज हो सकें। पुलिस द्वारा लगाई गई BNS की धारा 106(1) (गैर-इरादतन हत्या/लापरवाही से मृत्यु) और 289 (खतरनाक मशीनरी के संचालन में लापरवाही) इस मामले को कानूनी रूप से बेहद संवेदनशील और गंभीर बनाती हैं। धारा 106(1) यह स्पष्ट करती है कि यदि किसी कार्यस्थल पर उचित सावधानी के अभाव में मृत्यु होती है, तो जिम्मेदार पक्ष को आपराधिक उत्तरदायित्व से बचने का अधिकार नहीं मिलता। वहीं धारा 289 खतरनाक मशीनों और भारी उपकरणों के उपयोग में रखरखाव और सुरक्षा उपायों की अनिवार्यता को रेखांकित करती है। मजदूर संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने भी इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा प्रबंधन में त्वरित सुधार की मांग उठाई है। औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते हादसे और प्रबंधन पर दर्ज होते लगातार मामलों ने यह संदेश दिया है कि कार्यस्थल सुरक्षा सिर्फ नीति नहीं, बल्कि जीवन-रक्षा की प्राथमिक शर्त है। अब देखना होगा कि विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस और प्रशासन इस केस में किस स्तर तक जवाबदेही तय करते हैं और BSP प्रबंधन अपने सुरक्षा तंत्र में क्या ठोस सुधार लागू करता है।

ख़बरें और भी…

स्वतंत्र छत्तीसगढ़
स्वतंत्र छत्तीसगढ़https://swatantrachhattisgarh.com
(संपादक) इस साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी । स्वतंत्र छत्तीसगढ़ इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। स्वतंत्र छत्तीसगढ़ में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वतंत्र छत्तीसगढ़ या उसके स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्याय क्षेत्र रायपुर होगा ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

मंत्रालय में साय कैबिनेट की अहम बैठक, जनकल्याण और विकास एजेंडा पर हुई विस्तृत चर्चा…

रायपुर/छत्तीसगढ़ मंत्रालय, महानदी भवन में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में रणनीतिक...