स्वतंत्र छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स:
छत्तीसगढ़ में दिसंबर की ठंड ने इस बार लोगों को सचमुच हाड़ कंपाने पर मजबूर कर दिया है। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में न्यूनतम तापमान तेजी से गिरा है। मौसम विभाग ने 20 दिसंबर को कई जिलों के लिए शीतलहर की चेतावनी जारी की है, जिससे जनजीवन और अधिक प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
कड़ाके की ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त
प्रदेश में इन दिनों सर्द हवाओं के साथ कड़ाके की ठंड का असर साफ देखा जा रहा है। राजधानी रायपुर के साथ बिलासपुर, पेंड्रा और आसपास के इलाकों में सुबह और देर रात शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया है। ठंड इतनी तीव्र है कि लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं। सड़कों पर सुबह-सुबह घना कोहरा और ओस की परत नजर आ रही है, जिससे वाहन चालकों को भी परेशानी हो रही है। दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, मजदूर और स्कूली बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आ रहे हैं।
इन जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी
मौसम विभाग के अनुसार 20 दिसंबर को राजधानी रायपुर समेत कबीरधाम, राजनांदगांव, दुर्ग, कोरिया, बिलासपुर, कोरबा, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर, सरगुजा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, मुंगेली और बालोद जिलों में शीतलहर चलने की संभावना है। विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाओं के कारण प्रदेश में ठंड का असर लगातार बढ़ रहा है।
अलाव बना राहत का सहारा
तेज ठंड के बीच आम लोगों के लिए अलाव ही सबसे बड़ा सहारा बन रहा है। शहरों और कस्बों में लोग सड़कों के किनारे, चौक-चौराहों और मोहल्लों में खुद अलाव जलाकर ठंड से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रात और सुबह की ठंड असहनीय हो गई है, ऐसे में नगर निगम और प्रशासन को सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था करनी चाहिए। खासतौर पर गरीब, बुजुर्ग और खुले में काम करने वाले लोगों को ठंड से बचाने के लिए ठोस इंतजाम की जरूरत महसूस की जा रही है।
स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि शीतलहर के दौरान बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। गर्म कपड़े पहनने, सुबह-शाम अनावश्यक बाहर निकलने से बचने और गरम भोजन करने की सलाह दी जा रही है। मौसम विभाग ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे ठंड को हल्के में न लें और मौसम से जुड़ी चेतावनियों का पालन करें।


