खैरागढ़/छत्तीसगढ़
हाइलाइट
खैरागढ़ में बड़े ऑपरेशन के बाद 12 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। सुरक्षा बलों का कहना है कि “रामधेर गिरोह के आत्मसमर्पण से मोहला-मानपुर-राजनांदगांव क्षेत्र अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो गया है।” ग्रामीण इसे राहत की शुरुआत मानते हैं।
रामधेर के सरेंडर से ढह गया MMC ज़ोन का ढांचा
खैरागढ़ में सोमवार को 12 सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस और CRPF के सामने आत्मसमर्पण किया। सबसे बड़ा नाम रहा कुख्यात दस्ता सदस्य रामधेर, जो लंबे समय से MMC ज़ोन (मोहला-मानपुर-छुईखदान) में नक्सली गतिविधियों को संचालित करता था। अधिकारियों का कहना है कि इस सरेंडर के साथ इस ज़ोन की मुख्य हिंसक क्षमता लगभग समाप्त हो चुकी है और संगठन की पकड़ कमजोर हो गई है। स्थानीय नागरिकों ने राहत की सांस लेते हुए कहा, “अब गांवों में रातें पहले जैसी डरावनी नहीं रहीं।
आतंक से प्रभावित रहा मोहला-मानपुर-राजनांदगांव इलाका
इन नक्सलियों पर पुलिस ने कई हमलों, वसूली और ग्रामीणों को धमकाने जैसी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था। मोहला-मानपुर और राजनांदगांव जिले में इन्हीं समूहों ने सुरक्षा बलों पर कई बार हमले किए थे। रामधेर की टीम के सरेंडर से इलाके में सालों बाद शांति की उम्मीद जगी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “यह सिर्फ सरेंडर नहीं, एक पूरे क्षेत्र में विश्वास की वापसी है।”
सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी
सुरक्षा बलों का यह ऑपरेशन क्षेत्र में लंबे समय से चल रही रणनीति का परिणाम माना जा रहा है। प्रशासन ने सरेंडर करने वाले सभी नक्सलियों को पुनर्वास योजनाओं का लाभ देने की घोषणा की। पुलिस का मानना है कि आगे और भी नक्सली आत्मसमर्पण की कतार में हैं। अधिकारी ने बताया, “जब संगठन का मुख्य कमांडर ही हथियार डाल दे, तो बाकी ढांचा अपने-आप चरमराने लगता है।” ग्रामीणों का कहना है कि अब विकास कार्य तेज़ होने की उम्मीद है और बच्चे बिना डर के स्कूल जा पाएंगे।
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