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Friday, February 13, 2026

प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाणपत्र विवाद ने पकड़ा तूल , हाईकोर्ट आदेश के बाद भी कार्रवाई ठप — आंदोलन की चेतावनी…

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रायपुर/सरगुजा | विशेष रिपोर्ट छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर जाति प्रमाणपत्र को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है । प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते का जाति प्रमाणपत्र कथित रूप से फर्जी बताए जाने के बाद आदिवासी समाज में रोष बढ़ता जा रहा है । समाज ने प्रशासन पर कार्रवाई में ढिलाई का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर प्रमाणपत्र निरस्त नहीं किया गया तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे ।

जाति प्रमाणपत्र पर गंभीर आरोप:

जानकारी के मुताबिक , विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते का जाति प्रमाणपत्र बिना वैधानिक आधार के जारी किया गया बताया जा रहा है । आरोप है कि प्रमाणपत्र उनके पिता या पति के वैध जातीय दस्तावेजों के अभाव में जारी किया गया , जिससे इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठने लगे हैं । समाज का कहना है कि इस तरह जारी प्रमाणपत्र से अनुसूचित जनजाति वर्ग के असली अधिकारों का हनन हुआ है ।

प्रशासनिक जांच में खुलासा:

आवेदन मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच की गई , जिसमें दस्तावेजों की गंभीर कमी पाई गई । अनुविभागीय अधिकारी अम्बिकापुर और परियोजना कार्यालय अम्बिकापुर ने भी यह उल्लेख किया कि संबंधित मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं । इसके बावजूद प्रमाणपत्र जारी किया गया , जिससे संदेह और गहराता जा रहा है ।

हाईकोर्ट आदेश और प्रशासन की निष्क्रियता:

आदिवासी समाज ने इस मामले को बिलासपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी । कोर्ट ने 17 जून 2025 को आदेश जारी कर जिला स्तरीय और उच्च स्तरीय समिति को कार्रवाई के निर्देश दिए थे । लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस निर्णय नहीं होने पर समाज में असंतोष व्याप्त है ।

सत्यापन समिति की कार्रवाई और विधायक की अनुपस्थिति:

जिला स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने 28 अगस्त , 15 सितंबर और 29 सितंबर को विधायक को दस्तावेज प्रस्तुत करने के नोटिस जारी किए , लेकिन कथित रूप से वह सुनवाई में उपस्थित नहीं हुईं । समाज ने इसे जांच से बचने की कोशिश बताया है ।

‘फर्जी आदिवासी बनकर चुनाव लड़ने’ का आरोप :

आदिवासी समाज ने आरोप लगाया कि विधायक ने गलत प्रमाणपत्र के आधार पर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा । समाज ने इसे “राजनीतिक धोखाधड़ी” बताते हुए कहा कि इससे सच्चे आदिवासियों के अधिकारों का हनन हुआ है और संविधान की भावना का उल्लंघन हुआ है ।

आंदोलन की चेतावनी और बढ़ता राजनीतिक सरगर्मी:

आदिवासी समाज ने प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है । समाज ने कहा कि यदि कार्रवाई नहीं होती है , तो वे अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे । इस मामले ने प्रतापपुर और सरगुजा क्षेत्र में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है । दूसरी ओर , विधायक पक्ष की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है ।

आगे क्या हो सकता है:

अब नजरें जिला प्रशासन और जाति सत्यापन समिति की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं । यदि प्रमाणपत्र निरस्त होता है , तो विधायक की सदस्यता पर भी असर पड़ सकता है । वहीं , यदि प्रमाणपत्र वैध माना जाता है , तो विरोधी पक्ष इस मुद्दे को आगे अदालत में ले जाने की तैयारी में है ।

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