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Thursday, February 12, 2026

जहाँ इतिहास बोलता है और संस्कृति मुस्कुराती है — सिरपुर: भारत की आध्यात्मिक धरोहर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने की तैयारी!

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  • छत्तीसगढ़ का सिरपुर (श्रीपुर) — बौद्ध, जैन और हिंदू स्थापत्य कला का त्रिवेणी संगम।
  • महाशिवगुप्त बालार्जुन की राजधानी रह चुका यह नगर अब डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।
  • लक्ष्मण मंदिर, आनंदप्रभु कुटीर विहार और गंधेश्वर मंदिर सिरपुर की ऐतिहासिक पहचान हैं।
  • सरकार का विजन 2047: सिरपुर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाना और सांस्कृतिक धरोहरों को आधुनिक तकनीक से संरक्षित करना।

महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर का प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर — भारत का पहला ईंटों से निर्मित मंदिर, जो बौद्ध और हिंदू स्थापत्य कला का प्रतीक है।

सिरपुर: इतिहास, धर्म और कला का अनोखा संगम

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर (श्रीपुर) केवल एक पुरातात्त्विक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक आत्मा का प्रतीक है। यह नगर कभी महान सम्राट महाशिवगुप्त बालार्जुन की राजधानी रहा है और अपनी वास्तुकला, बौद्ध विहारों और प्राचीन मंदिरों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
प्राचीन ग्रंथों और अभिलेखों में सिरपुर का उल्लेख मिलता है। यहाँ भगवान शिव, विष्णु, बुद्ध और जैन धर्म के उपासना स्थलों के अवशेष मिले हैं, जो धार्मिक सहिष्णुता और कला के संगम का प्रमाण हैं।

बौद्ध, जैन और हिंदू संस्कृति का त्रिवेणी संगम

सिरपुर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह स्थान तीन प्रमुख धर्मों — हिंदू, बौद्ध और जैन परंपरा — के सह-अस्तित्व का प्रमाण देता है। यहाँ 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 3 जैन विहार और एक विशाल बौद्ध विहार के अवशेष मिले हैं।
यहाँ स्थित लक्ष्मण मंदिर, भारत का पहला ईंटों से बना मंदिर माना जाता है, जो स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है।
आनंदप्रभु कुटीर विहार में चीन से आए भिक्षु रह चुके हैं, जो भारत और एशिया के बीच बौद्ध संबंधों का सशक्त प्रमाण है। वहीं, गंधेश्वर मंदिर में भगवान शिव की मूर्तियाँ और अद्भुत कलाकृतियाँ देखने को मिलती हैं।

अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर कदम

चीनी यात्री ह्वेनसांग ने 7वीं शताब्दी में सिरपुर का उल्लेख अपनी यात्राओं में किया था, जिससे यह नगर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर चुका है।
1872 में अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा सिरपुर के अवशेषों की खोज के बाद यहाँ कई बार उत्खनन हुआ, जिनमें बौद्ध, जैन और हिंदू परंपराओं के असंख्य साक्ष्य मिले।
आज भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा यहाँ संरक्षण कार्य जारी है। डिजिटल टूर, क्यूआर कोड आधारित जानकारी और 3D गाइडेंस सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है ताकि पर्यटक इतिहास को महसूस कर सकें।

सिरपुर महोत्सव: संस्कृति और पर्यटन का उत्सव

हर वर्ष आयोजित होने वाला सिरपुर महोत्सव अब छत्तीसगढ़ की पहचान बन चुका है। इस आयोजन में देश-विदेश के कलाकार शास्त्रीय नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियाँ देते हैं।
राज्य सरकार द्वारा यहाँ ईको-ट्रेल, स्थानीय हस्तशिल्प बिक्री केंद्र और पारंपरिक भोजनालयों को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि स्थानीय समुदाय को रोजगार मिले और पर्यटन अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
विद्यार्थियों के लिए सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहरों पर आधारित शैक्षणिक पाठ्यक्रम भी शुरू किया गया है।

विजन 2047: सिरपुर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने की पहल

छत्तीसगढ़ सरकार ने सिरपुर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने का लक्ष्य तय किया है।
विजन 2047 के तहत यहाँ आधुनिक सड़कें, प्रकाश व्यवस्था, पर्यटक कॉरिडोर और अत्याधुनिक संरक्षण तकनीकें विकसित की जा रही हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि सिरपुर को ऐसा विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाया जाए, जहाँ इतिहास, अध्यात्म और आधुनिकता का संगम हो।

सिरपुर: जहाँ संस्कृति सांस लेती है

सिरपुर केवल एक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव है — जहाँ इतिहास बोलता है, संस्कृति मुस्कुराती है और अध्यात्म सांस लेता है। यहाँ की मूर्तियाँ, मंदिर, विहार और लोक परंपराएँ भारत की अखंड सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक हैं।
यह स्थान हमें यह संदेश देता है कि भारत की आत्मा उसकी सहिष्णुता, कला और ज्ञान में बसती है।

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