स्वतंत्र छत्तीसगढ़ /मध्यप्रदेश
भोपाल में आयोजित “किसान आभार सम्मेलन” में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों को राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार की सभी प्राथमिकताएँ अब कृषि पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि भावांतर योजना, सिंचाई परियोजनाओं और सौर ऊर्जा पंप जैसी पहलों का उद्देश्य केवल राहत देना नहीं, बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। CM ने भरोसा दिलाया कि किसान की मेहनत का मूल्य उसके पसीना सूखने से पहले मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि भावांतर योजना किसानों को बाजार मूल्य के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा देती है, जिससे उनका न्यूनतम लाभ सुनिश्चित होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य को “भारत की खाद्य टोकरी” बनाने के पीछे किसानों का अथक परिश्रम है। कृषि का राज्य GDP में 39% से अधिक योगदान है, और यही कारण है कि अब मध्य प्रदेश सोयाबीन, मसाला, लहसुन, संतरे सहित कई उपज में देश में अग्रणी बन चुका है। सरकार अब प्रसंस्करण इकाइयों पर काम कर रही है ताकि किसान अतिरिक्त उपज को फेंकने के बजाय उसका लाभ कमा सकें।
किसानों को ऊर्जा दाता की उपाधि देते हुए CM यादव ने कहा कि सौर पंप लगाने पर अब 90% तक सब्सिडी मिलेगी, जो पहले 40% थी। राज्य सरकार 32 लाख सोलर पंप उपलब्ध करा रही है जिससे किसानों को महंगी अस्थायी बिजली कनेक्शन से मुक्ति मिलेगी। किसान 5 HP तक के सौर पंप से न केवल सिंचाई करेंगे, बल्कि अतिरिक्त ऊर्जा बेचकर आय भी अर्जित कर सकेंगे। सरकार का लक्ष्य सिंचित क्षेत्र को 52 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक पहुँचाना है।
जल संरक्षण और सिंचाई को “कृषि का अमृत” बताते हुए मुख्यमंत्री ने तीन प्रमुख नदी-जोड़ो परियोजनाओं—पार्वती-कालीसिंध-चंबल, केन-बेतवा और ताप्ती मेगा रिचार्ज—का उल्लेख किया। नर्मदा नदी को किसानों के लिए वरदान बताते हुए उन्होंने कहा कि अब कोई खेत पानी से वंचित नहीं रहेगा। सम्मेलन में शामिल लगभग 3,000 किसानों को सरकार ने यह भरोसा दिलाया कि कल्याणकारी योजनाएँ केवल कागजों पर नहीं रहेंगी, बल्कि पारदर्शिता और तेजी से ज़मीन पर लागू होंगी। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने भी भावांतर को किसानों के लिए “जीवन दायिनी योजना” बताया। यह सम्मेलन केवल धन्यवाद नहीं, बल्कि किसान समृद्धि की अगली अध्याय का ऐलान था।
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