भोपाल / मध्यप्रदेश
मुख्य बातें
- देर रात विधानसभा सचिवालय खुलने पर विवाद
- जीतू पटवारी ने बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप
- विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने की आशंका
- कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग बताया
- भाजपा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
विधानसभा सचिवालय में रात की हलचल से बढ़ा राजनीतिक तापमान
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विधानसभा सचिवालय को लेकर सियासत अचानक तेज हो गई है। देर रात सचिवालय खुलने और गतिविधियां होने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर गंभीर सवाल उठाए हैं। खासतौर पर कांग्रेस ने इसे असामान्य और संदिग्ध बताते हुए पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
जीतू पटवारी का अचानक पहुंचना और उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी रात करीब 10 बजे अचानक विधानसभा सचिवालय पहुंच गए, जिससे वहां हड़कंप मच गया। उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें वह मुख्य सचिव के कक्ष में प्रवेश करते नजर आए। उस समय कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा पहले से मौजूद थे। पटवारी ने मुख्य सचिव से सीधा सवाल किया कि जब संबंधित विधायक के पास कोर्ट का स्टे है, तो देर रात सचिवालय खोलने की क्या जरूरत पड़ी।
सदस्यता खत्म करने की साजिश का आरोप
पटवारी ने आरोप लगाया कि विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने के लिए यह पूरी कार्रवाई की जा रही है और यह सब भाजपा के इशारे पर हो रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का इस तरह उपयोग चिंताजनक है। कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए इसे “सत्ता का दुरुपयोग” और “राजनीतिक गुंडागर्दी” करार दिया है।
कांग्रेस का सख्त रुख, लड़ाई जारी रखने का ऐलान
कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मुद्दे को लेकर वह पीछे नहीं हटेगी और हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी। पार्टी का कहना है कि विधानसभा सचिवालय एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और वहां इस तरह की गतिविधियां लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करती हैं। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
भाजपा की चुप्पी से बढ़े सवाल
इस पूरे विवाद के बीच सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब तक भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की चुप्पी इस मुद्दे को और संवेदनशील बना रही है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, खासकर यदि इस पर कानूनी या विधानसभा स्तर पर कोई बड़ा कदम उठाया जाता है।
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