बिलासपुर, छत्तीसगढ़:
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) घोटाला मामले में कथित मुख्य आरोपियों में शामिल मोक्षित कॉरपोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस में अदालत ने उन्हें नियमित जमानत प्रदान कर दी है।
चीफ जस्टिस की बेंच ने दी राहत
बिलासपुर हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने शशांक चोपड़ा की जमानत याचिका पर सुनवाई की। बचाव पक्ष की ओर से स्वास्थ्य संबंधी कारण, पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड न होने और लंबे समय से जेल में बंद होने का हवाला दिया गया।
वहीं ED की ओर से जमानत का विरोध किया गया, लेकिन अदालत ने माना कि आरोपी जनवरी 2025 से लगातार न्यायिक हिरासत में है और PMLA के तहत जांच पूरी हो चुकी है। साथ ही अभियोजन शिकायत भी दाखिल की जा चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट से पहले ही मिल चुकी थी राहत
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि मूल (Predicate) अपराध से जुड़े EOW_ACB केस में सुप्रीम कोर्ट पहले ही शशांक चोपड़ा को जमानत दे चुका है।
अदालत ने माना कि मामले का ट्रायल लंबा चल सकता है और ऐसी स्थिति में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर नियमित बेल मंजूर की गई।
ED और EOW_ACB दोनों मामलों में मिली बेल
गौरतलब है कि CGMSC घोटाले से जुड़े EOW_ACB केस में भी शशांक चोपड़ा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है। अब ED और EOW_ACB दोनों मामलों में जमानत मिलने के बाद उनके जेल से बाहर आने का रास्ता लगभग साफ हो गया है।
क्या है CGMSC घोटाला मामला?
CGMSC घोटाला सरकारी मेडिकल उपकरणों और रीएजेंट्स की खरीद में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला है। जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ अधिकारियों और निजी कंपनियों ने मिलकर टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं।
आरोप है कि बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर मेडिकल उपकरण और सामग्री खरीदी गई, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा।
इस पूरे मामले की जांच ACB, EOW और ED द्वारा की जा रही है। फिलहाल अदालत से जमानत मिलने के बाद अब सभी की नजर आगामी सुनवाई और अंतिम न्यायिक फैसले पर टिकी हुई है।
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