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Friday, February 13, 2026

क्या बेघर होंगे 48 परिवार? जगदलपुर रेलवे कॉलोनी में बुलडोज़र कार्रवाई से मचा हाहाकार…

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जगदलपुर के संजय गांधी वार्ड स्थित रेलवे कॉलोनी में शनिवार को प्रशासन एवं रेलवे विभाग की संयुक्त कार्रवाई से हड़कंप मच गया। सुबह-सुबह 32 अवैध मकानों पर बुलडोज़र चलाकर तोड़फोड़ की गई, जिसके बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार और आक्रोश का माहौल बन गया। कई परिवार खुले आसमान तले आ गए और रोते-बिलखते हुए प्रशासन को न्याय की गुहार लगाने लगे।

बिना नोटिस घर उजाड़े जाने का आरोप

पीड़ित आशीष पानी ने बताया कि वे रोज़ की तरह दिहाड़ी मजदूरी पर गए थे, लेकिन लौटकर देखा तो उनका घर मलबे में बदल गया। उनका आरोप है कि किसी भी प्रकार की पूर्व सूचना या नोटिस दिए बिना यह कार्रवाई की गई।

“हमारा घर तोड़ दिया गया, सामान बर्बाद हो गया… अब हम कहां जाएं? प्रधानमंत्री आवास योजना का फॉर्म भरा है, पर मंजूरी अभी तक नहीं मिली,” – आशीष पानी, पीड़ित

पार्षद ने जताया विरोध, कार्रवाई रोकी गई

वार्ड पार्षद कोमल सेना का कहना है कि उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी तक नहीं दी गई। वार्ड भ्रमण के दौरान जब उन्होंने बुलडोज़र देखा, तब जाकर हस्तक्षेप किया और विरोध करते हुए कार्रवाई रुकवाई।

“48 परिवारों के लिए आवास योजना के फॉर्म जमा हैं, पर सरकारी प्रक्रिया में देरी हो रही है। इन गरीब परिवारों को बस थोड़ा समय चाहिए,” – कोमल सेना, पार्षद

प्रशासन का दावा – नोटिस पहले ही दिए गए थे

एडीएम नागा प्रसाद ने बताया कि सभी कब्जाधारियों को पूर्व में नोटिस जारी किया गया था और 30 सितंबर को तोड़फोड़ की तारीख तय थी, पर दशहरा के कारण उसे रोका गया था। आज पुनः कार्रवाई शुरू की गई, पर पीड़ितों की मांग पर फिलहाल इसे रोका गया है।

“आगे की कार्रवाई रेलवे विभाग के निर्देश पर निर्भर करेगी,” – नागा प्रसाद, एडीएम, जगदलपुर

रेलवे की सफाई – हमारी जमीन पर अवैध कब्जे

रेलवे विभाग का कहना है कि यह भूमि रेलवे संपत्ति है, जिस पर वर्षों से लोग अवैध रूप से बने मकानों में रह रहे थे। प्रशासनिक दबाव और कानूनी प्रक्रिया के तहत यह कार्रवाई की गई।

मुख्य प्रश्न अब भी बाकी है… क्या इन गरीब परिवारों को स्थायी छत मिलेगी या मलबे पर ही नए संघर्ष लिखे जाएंगे?

48 परिवारों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन कर रखा है, लेकिन स्वीकृति की प्रतीक्षा अब उनके लिए असमंजस और निराशा का कारण बन चुकी है। आज कार्रवाई रुकी है, पर कल फिर बुलडोज़र लौटेगा या राहत—यह किसी को नहीं पता।

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